रायपुर : छत्तीसगढ़ में जनगणना के प्रारंभिक चरण के बीच ही शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रायपुर और बिलासपुर से सामने आई दो अलग-अलग घटनाओं में शिक्षकों के साथ मारपीट की घटना ने साफ कर दिया है कि फील्ड में काम कर रहे प्रगणक जोखिम के बीच अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। दो दिनों के भीतर दो शिक्षकों के साथ हुई मारपीट की घटना पर सहायक शिक्षक एवं समग्र शिक्षक फेडरेशन ने तीखी आलोचना करते हुए शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
गौरतलब है कि 1 मई से जनगणना का प्रारंभिक चरण शुरू हो गया है। जिसके तहत प्रगणक घर-घर पहुंचकर मकानों का सूचीकरण कर रहे है। ऐसे में कई स्थानों से प्रगणकों के साथ अभद्रता और मारपीट की घटना सामने आ रही है। पहली घटना राजधानी रायपुर के रामनगर वार्ड क्रमांक 24 की है, जहां जनगणना कार्य में लगे एक शिक्षक के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया। पीड़ित प्रगणक रामकृष्ण साहू ने थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उन्हें नगर निगम जोन क्रमांक 7 के अंतर्गत रामनगर क्षेत्र में ड्यूटी सौंपी गई थी।
1 मई को सुबह 10 बजे से वे घर-घर जाकर जानकारी एकत्र कर रहे थे। शाम करीब 5 बजे जब वे नजरी नक्शा तैयार करने के लिए जानकारी जुटा रहे थे। तभी उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की गई। घटना के बाद शिक्षक ने अपनी सुरक्षा को लेकर पुलिस से गुहार लगाई है। वहीं दूसरी घटना बिलासपुर जिले के बिल्हा थाना क्षेत्र के ग्राम घोघरा से सामने आई है। यहां जनगणना ड्यूटी में पहुंचे शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला उड़नताल में पदस्थ शिक्षक नेतराम पैकरा के साथ मारपीट की गई। जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह करीब 10 बजे वे मकान क्रमांक 141 के पास पहुंचे थे।
तभी गांव का ही एक व्यक्ति निर्मल सतनामी वहां पहुंचा और सवाल-जवाब के दौरान अचानक मारपीट शुरू कर दी। शिक्षक ने उसे अपनी ड्यूटी के बारे में समझाने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने एक नहीं सुनी और उनका आईडी कार्ड भी फाड़ दिया। इन दोनों घटनाओं ने जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में लगे शिक्षकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब तक फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक इस तरह की घटनाएं कार्य में बाधा बनती रहेंगी।





















