बलरामपुर : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में सर्पदंश की एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के डंभाटोली गांव में जहरीले सांप के काटने से पिता और उसकी 4 वर्षीय बेटी की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सांप के डसने के बाद परिजन तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराते रहे, जिससे इलाज में देरी हुई और दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी।
रात में बिस्तर पर चढ़ा जहरीला सांप
जानकारी के अनुसार, शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम डंभाटोली निवासी शनिचरा पैंकरा (36 वर्ष) अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ जमीन पर सो रहे थे। सोमवार देर रात करीब 12 बजे एक जहरीला सांप बिस्तर पर चढ़ गया और उसने शनिचरा तथा उसकी 4 वर्षीय बेटी महंती को डस लिया।कुछ देर बाद शनिचरा की नींद खुली तो उसने बिस्तर पर सांप देखा। इसके बाद पिता और बेटी दोनों की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी।
अस्पताल की जगह पहले झाड़-फूंक
परिजनों ने तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय गांव में झाड़-फूंक का सहारा लिया। इस दौरान कई घंटे बीत गए। सुबह करीब 4 बजे हालत गंभीर होने पर दोनों को शंकरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने 4 वर्षीय महंती को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर हालत में शनिचरा पैंकरा को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई।
सरगुजा में भी करैत के डसने से किशोरी की मौत
इधर, सरगुजा जिले के लखनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम सकरिया में भी सर्पदंश से एक 13 वर्षीय बालिका की मौत हो गई। मृतका आसमनी एक्का अपने मामा के घर आई हुई थी। सोमवार रात करीब 9:30 बजे वह अपनी मौसी के साथ जमीन पर सो रही थी। इसी दौरान करैत सांप ने उसे डस लिया। हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
बरसात में बढ़ रहे सर्पदंश के मामले
बरसात के मौसम में सांप अक्सर घरों में घुस आते हैं, जिससे सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सांप काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय पीड़ित को बिना देर किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। समय पर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है।























