सूरजपुर : सूरजपुर जिले के देवीपुर स्थित अंबेडकरपारा के शासकीय माध्यमिक विद्यालय में छात्रों से मिड-डे मील के बड़े-बड़े बर्तन नाले के गंदे पानी में धुलवाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है।मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विद्यालय की प्रधान पाठक मारिया गोरेती को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा दो सहायक शिक्षक प्रेमलता पांडे और जीतेश्वरी की वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी गई है। वहीं दो संकुल प्राचार्यों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इस प्रकार पूरे मामले में कुल पांच शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
दरअसल, यह मामला सूरजपुर जिले के देवीपुर स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय अंबेडकरपारा देवीपुर से जुड़ा हुआ है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें स्कूल के छोटे-छोटे छात्र मिड-डे मील के बाद खाना पकाने वाले बड़े-बड़े बर्तनों को धोते हुए दिखाई दे रहे थे।वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बच्चे इन बर्तनों को साफ पानी से नहीं, बल्कि स्कूल के पास बह रहे नाले के गंदे पानी में धो रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब शिक्षकों की मौजूदगी में हो रहा था। इससे बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।
छात्रों से करवाई जा रही थी मजदूरी
जानकारी के मुताबिक, स्कूल में मिड-डे मील बनने के बाद छात्रों से ही बड़े-बड़े बर्तन साफ करवाए जाते थे। इतना ही नहीं, इन बर्तनों को साफ करने के लिए बच्चों को पास के नाले में भेजा जाता था, जहां गंदे पानी में उन्हें बर्तन धोने पड़ते थे।इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छोटे बच्चों से इस तरह का काम करवाना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है।
शिक्षा विभाग ने की सख्त कार्रवाई
मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और जांच के बाद संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा ने कहा कि बच्चों से इस तरह का काम करवाना पूरी तरह अनुचित है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल इस मामले में प्रधान पाठक को निलंबित कर दिया गया है और अन्य संबंधित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शिक्षा विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।






















