अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग महिला को कागजों में मृत घोषित कर उसकी करीब 6 एकड़ की कीमती जमीन अपने नाम कराने की साजिश रची गई। हैरानी की बात यह है कि जिस महिला को रिकॉर्ड में मृत दिखाया गया, वह आज भी जीवित है और खुद न्याय की गुहार लगा रही है। पीड़ित महिला की पहचान अंबिकापुर विकासखंड के मेंड्रा खुर्द गांव निवासी सुगामती राजवाड़े के रूप में हुई है। सुगामती राजवाड़े ने आरोप लगाया है कि उनके ही भतीजे कवलसाय ने साजिश रचकर उन्हें मृत घोषित कराया
और राजस्व रिकॉर्ड में उनकी पूरी जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। महिला का कहना है कि उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी तब हुई, जब उन्हें अपनी जमीन से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ी का शक हुआ। पीड़िता का आरोप है कि बिना किसी सूचना, बिना उनकी उपस्थिति और बिना किसी सत्यापन के उनका मृत्यु प्रमाण पत्र और तथाकथित “मृत्यु प्रणाम पत्र” तैयार कर लिया गया। सुगामती राजवाड़े ने सवाल उठाया है कि आखिर जब वह जीवित हैं, तो उनका मृत्यु दस्तावेज कैसे बन गया और किन परिस्थितियों में यह राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। महिला ने अपने भतीजे कवलसाय सहित चार लोगों पर जमीन हड़पने की साजिश का आरोप लगाया है।
साथ ही उन्होंने इस पूरे प्रकरण में पटवारी, राजस्व विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई है। पीड़िता का कहना है कि बिना राजस्व अमले की मदद के इस तरह की प्रक्रिया पूरी होना संभव नहीं है। फिलहाल यह मामला राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है और फरवरी माह में इसकी अगली सुनवाई की तारीख तय की गई है। सुगामती राजवाड़े ने न्यायालय से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि उनका मृत्यु प्रणाम पत्र किसने, कैसे और किन आधारों पर तैयार किया। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है।
इस घटना ने न केवल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह किसी जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर उसकी संपत्ति हड़पी जा सकती है, तो यह सिस्टम की बड़ी खामी को दर्शाता है। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि बुजुर्ग और अकेले रहने वाले लोगों की जमीन पर अक्सर नजरें गड़ी रहती हैं और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन बहुत कम मामलों में सच्चाई सामने आ पाती है।





















