इंदौर : मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के स्कूल शिक्षा विभाग में करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का खुलासा हुआ है। यह घोटाला इंदौर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय में सामने आया है, जहां कर्मचारियों ने सरकारी राशि को परिजनों, रिश्तेदारों और दोस्तों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर निकाल लिया। यह गड़बड़ी 2017 से लगातार की जा रही थी और हैरानी की बात यह है कि स्थानीय अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। भोपाल ट्रेजरी की जांच में पूरा मामला उजागर हुआ है।
ऑपरेटर और क्लर्क की भूमिका अहम
मिली जानकारी के अनुसार, कार्यालय के एक ऑपरेटर और एक क्लर्क ने मिलकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। जिस भी सरकारी मद में राशि शेष रह जाती थी, उसे आरोपी सीधे अपने करीबी लोगों के खातों में ट्रांसफर कर देते थे। यह धांधली पांच अलग-अलग BEO Office Corruption के कार्यकाल के दौरान की गई। भोपाल की जांच टीम ने जब संदिग्ध कर्मचारियों से बैंक खातों का विवरण मांगा, तो उन्होंने टालमटोल शुरू कर दी।
इसके बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 150 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। आशंका जताई जा रही है कि रिश्तेदारों के खातों का उपयोग कर कमीशन के आधार पर सरकारी राशि निकाली गई, जबकि शेष रकम आरोपियों ने स्वयं रख ली।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
आपको बता दें कि इससे पहले भी इंदौर में कलेक्टर कार्यालय में इसी तरह का घोटाला सामने आ चुका है, जिसमें कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की गई थी। अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है कि आखिर आठ साल तक यह घोटाला कैसे चलता रहा और जिम्मेदार अधिकारी कैसे अनजान बने रहे। फिलहाल पुलिस और प्रशासन आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।






















