धमतरी : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में वन विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां विभाग के ही एक जिम्मेदार अधिकारी पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं। मगरलोड ब्लॉक के ग्राम सोनपैरी के ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर वन विभाग के डिप्टी रेंजर के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि मोहंदी परिक्षेत्र में पदस्थ डिप्टी रेंजर मुकुंद राव वाहने ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए हजारों पेड़ों की अवैध कटाई करवाई है।
इसके साथ ही करीब 75 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा करने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक यह जमीन घास और आबादी भूमि के रूप में चिन्हित है, जिस पर इस तरह का कब्जा पूरी तरह से गैरकानूनी है।
जंगल में सड़क और खुदाई का आरोप
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बिना किसी वैध अनुमति के जंगल के अंदर सड़क निर्माण और भारी मशीनों से खुदाई कराई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस कार्य के दौरान जंगल के बीच गहरी खाइयां खोदी गई हैं, जिससे न केवल प्राकृतिक संतुलन बिगड़ा है, बल्कि वन्य जीवों के लिए भी खतरा पैदा हो गया है।स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी की गई है। सैकड़ों की संख्या में पेड़ों की कटाई से क्षेत्र में हरियाली को भारी नुकसान पहुंचा है और इससे जलवायु पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
वन विभाग पर ही नियम तोड़ने के आरोप
इस पूरे मामले की सबसे गंभीर बात यह है कि जिन अधिकारियों पर जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हीं पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि वन विभाग के अधिकारी द्वारा ही इस तरह की गतिविधियों को अंजाम दिया जाना बेहद चिंताजनक है।ग्राम सोनपैरी के लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से इस मामले को लेकर आवाज उठा रहे थे, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। इसके बाद मजबूर होकर उन्हें कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिकायत दर्ज करानी पड़ी।
कलेक्ट्रेट में सौंपा ज्ञापन
ग्रामीणों और ग्राम समिति के सदस्यों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन को विस्तृत लिखित शिकायत पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित क्षेत्र में सभी प्रकार के निर्माण कार्य और खुदाई पर तत्काल रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो जंगल और पर्यावरण को और अधिक नुकसान हो सकता है।
प्रशासन ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी संज्ञान लिया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच के लिए वन विभाग के उच्च अधिकारियों से रिपोर्ट मंगाई जाएगी और संबंधित डीएफओ से पूरी जानकारी लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, अवैध रूप से किए गए कार्यों को भी रोका जाएगा।
पर्यावरण पर पड़ रहा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की अवैध कटाई और खुदाई से न केवल जंगल की जैव विविधता प्रभावित होती है, बल्कि जल स्रोतों और मिट्टी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से भू-क्षरण की समस्या बढ़ सकती है और इससे स्थानीय जलवायु भी प्रभावित हो सकती है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने प्रशासन से पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों को दंडित करने की अपील की है।






















