बिलासपुर : महीने भर पहले शिक्षकों को कुत्तों को भगाने और बच्चों को बचाने की ड्यूटी दी गयी थी। लेकिन, अब जिन कुत्तों को भगाया गया, वो शिक्षकों ने अपनी खुन्नस निकाल रहे हैं। कुत्तों ने शिक्षकों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है। मामला बिलासपुर का है, जहां शहर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला सरकंडा के खमतराई इलाके से सामने आया है, जहां PM श्री स्कूल परिसर में एक पागल कुत्ते ने हमला कर दिया।
इस हमले में पहली कक्षा का एक मासूम छात्र और एक शिक्षिका गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद स्कूल परिसर और आसपास के इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है।स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में पिछले कई दिनों से एक पागल कुत्ता घूम रहा है, जो राह चलते लोगों और बच्चों पर हमला कर रहा है। अब तक कुल 10 लोग कुत्ते के हमले में घायल हो चुके हैं, जिनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। इसके बावजूद नगर निगम और प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
बच्चों की सुरक्षा में लगे शिक्षक ही बने शिकार
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग ने पहले ही स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाई थी। शिक्षकों को स्कूल आने-जाने के समय बच्चों पर नजर रखने और कुत्तों को परिसर से दूर भगाने की जिम्मेदारी दी गई थी।लेकिन विडंबना यह है कि अब वही शिक्षक खुद कुत्तों के हमले का शिकार बन रहे हैं। हालिया घटना में एक शिक्षिका बच्चों को सुरक्षित करने की कोशिश कर रही थी, तभी पागल कुत्ते ने उन पर हमला कर दिया। इससे शिक्षकों में भी भय का माहौल बन गया है।
स्कूल परिसर में दहशत का माहौल
PM श्री स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक बेहद चिंतित हैं। उनका कहना है कि बच्चे डर के साए में स्कूल आ-जा रहे हैं। कई अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया है। स्कूल परिसर में लगातार कुत्तों के घूमने से पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर नगर निगम और संबंधित विभागों में कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। न तो कुत्तों को पकड़ा गया और न ही इलाके में निगरानी बढ़ाई गई।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
लगातार हो रहे हमलों के बाद अब स्थानीय नागरिकों का गुस्सा फूटने लगा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई की गई होती, तो इतने लोग घायल नहीं होते। स्कूल जैसे संवेदनशील स्थान पर पागल कुत्ते का खुलेआम घूमना प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है।लोगों ने मांग की है कि इलाके में तत्काल आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया जाए और पागल कुत्ते को जल्द से जल्द हटाया जाए। साथ ही घायल लोगों के इलाज और एंटी-रेबीज इंजेक्शन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
कुत्तों के लगातार हमलों से न सिर्फ बच्चे बल्कि शिक्षक और आम लोग भी डरे हुए हैं। शिक्षक संगठनों ने भी इस मामले में नाराजगी जताई है और कहा है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ शिक्षकों की जान की जिम्मेदारी भी प्रशासन की है।यदि जल्द ही स्थिति पर काबू नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।






















