कांकेर : उत्तर बस्तर कांकेर जिले में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन हो रही दुर्घटनाएं न सिर्फ यातायात व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं, बल्कि लोगों के मन में भय भी पैदा कर रही हैं। गुरुवार को जहां रतेसरा के पास दो ट्रकों की भीषण भिड़ंत में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, वहीं महज 24 घंटे के भीतर एक और बड़ा हादसा सामने आ गया। शुक्रवार देर रात नेशनल हाइवे-30 पर स्कॉर्पियो और बोलेरो वाहन के बीच जोरदार टक्कर हो गई।
यह हादसा कांकेर कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास हुआ, जहां तेज रफ्तार से आ रहे दोनों वाहनों की आमने-सामने टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों गाड़ियों के अगले हिस्से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। टक्कर की आवाज दूर तक सुनाई दी, जिससे आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों वाहनों में कई लोग सवार थे, जो टक्कर के बाद गाड़ियों में फंस गए।
सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और राहगीर घायलों को बाहर निकालने में जुट गए। कुछ ही देर में पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। इस दर्दनाक हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 12 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल कांकेर पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि स्कॉर्पियो और बोलेरो में सवार लोग कौन थे और वे कहां जा रहे थे। दुर्घटना के कारणों को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना हादसे की वजह हो सकता है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाकर यातायात बहाल कराया।
पुलिस ने मर्ग कायम कर मृतकों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है और घायलों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं से स्थानीय लोगों में आक्रोश और चिंता दोनों देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि नेशनल हाइवे-30 पर तेज रफ्तार वाहनों और भारी ट्रैफिक के बावजूद सुरक्षा इंतजाम नाकाफी हैं। सड़क किनारे संकेतक, स्पीड कंट्रोल और नियमित पेट्रोलिंग की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है।






















