कोरबा : छत्तीसगढ़ में इस बार होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि नीति और राजनीति के टकराव का कारण भी बन गई है। नई आबकारी नीति के तहत राज्य सरकार ने होली के दिन शराब दुकानों को खुला रखने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और विपक्ष सरकार को घेरने में जुट गया है। इसी बीच प्रदेश के आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा कि आबकारी नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला कलेक्टर को वर्ष में तीन दिन शराब दुकानें बंद रखने का अधिकार है। यदि कानून.व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए आवश्यक समझा जाएए तो कलेक्टर अपने विवेकाधिकार से दुकानों को बंद करने का निर्णय ले सकते हैं।
गौरतलब है कि नई आबकारी नीति में निषेध दिवसों की सूची में संशोधन किया गया है। अब केवल 15 अगस्त, 26 जनवरी, 2 अक्टूबर और 18 दिसंबर को ही शराब दुकानें बंद रहेंगी। होली, मुहर्रम और 30 जनवरी (महात्मा गांधी की पुण्यतिथि) को निषेध दिवसों की सूची से हटा दिया गया है। इसी बदलाव के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राज्य स्तर पर यह स्पष्ट संदेश है कि होली निषेध दिवस नहीं है, लेकिन कोरबा में आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन के बयान के बाद निर्णय की अंतिम जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन पर आ गई है। दरअसल होली में शराब दुकान खुलने को लेकर गरमायी राजनीति के बीच आज कोरबा में आबकारी मंत्री देवांगन से मीडिया ने इस मुद्दे पर सवाल किया।
मंत्रीजी ने बड़े ही सधे हुए अंदाज में जवाब देते हुए कहा दिया कि….सरकार ने आबकारी नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। होली में शराब दुकाने खोले जाने के मुद्दे पर उन्होने सरकार के फैसले की वजह बताने के बजाये ये उन्होने कलेक्टर का अधिकार बता दिया। मंत्रीजी ने स्पष्ट किया कि कलेक्टर को साल में 3 दिन शराब दुकान बंद करने का अधिकार होता है। कानून-व्यवस्था और परिस्थिति के हिसाब से कलेक्टर चाहे तो होली में भी दुकान बंद कर सकते है। आबकारी मंत्री देवांगन ने भले ही सरकार के फैसले को बचाते हुए शराब दुकान बंद करने का निर्णय कलेक्टर के पाले में डाल दिया। लेकिन सवाल अब भी वही कि कलेक्टर किस आधार पर दुकानें बंद या खुली रखने का फैसला करेंगे ?
मसलन यदि कोई कलेक्टर दुकानें बंद करने का निर्णय लेते है, तो सीधे सरकार की नजर में आयेंगे ? वहीं यदि दुकानें खुली रहती हैं और कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है, तो जवाबदेही किसकी होगी ? सरकार का तर्क है कि प्रतिबंध से अवैध शराब बिक्री बढ़ती है और राजस्व का नुकसान होता है। नियंत्रित बिक्री व्यवस्था से पारदर्शिता बनी रहती है। हालांकि होली जैसे सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व के पर्व पर लिए गए इस निर्णय का व्यापक सामाजिक संदेश भी चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल होली से पहले यह मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में है और आबकारी मंत्री के इस बयान के बाद अब सभी की निगाहें होली से ठीक पहले कलेक्टर के निर्णय पर टिकी हुई हैं।






















