बलौदाबाजार : सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों से जुड़े दो वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो ने न केवल आम लोगों को चौंकाया है, बल्कि प्रशासन, शिक्षा विभाग और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में छात्र फेयरवेल पार्टी के नाम पर लग्जरी गाड़ियों में पहुंचते और बाद में सार्वजनिक सड़कों पर तेज रफ्तार में वाहन चलाते हुए खतरनाक स्टंट करते नजर आ रहे हैं।
कटगी क्षेत्र का मामला
पहला मामला कटगी क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां एक शासकीय स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों की फेयरवेल पार्टी आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम में छात्र 15 से 20 लाख रुपये कीमत की लग्जरी गाड़ियों में पहुंचे। जानकारी के मुताबिक, इनमें से एक वाहन किराए पर लिया गया था, जबकि बाकी वाहन छात्रों के परिजनों के बताए जा रहे हैं। फेयरवेल के दौरान और उसके बाद छात्रों द्वारा लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने और यातायात नियमों के उल्लंघन का वीडियो सामने आते ही पुलिस हरकत में आई।
पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 16 बालिग छात्रों सहित कुल 26 वाहन चालकों के खिलाफ लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने के आरोप में चार आपराधिक प्रकरण दर्ज किए। इसके साथ ही मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184 के तहत सभी आरोपियों पर कार्रवाई की गई और उन्हें न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने इस मामले में वाहन मालिकों पर कुल 32 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
कसडोल का दूसरा मामला
दूसरा मामला कसडोल स्थित स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल से जुड़ा हुआ है। यहां शनिवार को आयोजित फेयरवेल पार्टी के बाद छात्र—जिनमें कुछ छात्राएं भी शामिल थीं—सड़कों पर तेज रफ्तार में वाहन चलाते और स्टंट करते नजर आए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, इस मामले में अब तक किसी भी प्रकार की ठोस प्रशासनिक या पुलिस कार्रवाई नहीं की गई है, जिसे लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
उठते सवाल और बढ़ती चिंता
इन दोनों घटनाओं ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और कानून के प्रति उनके दृष्टिकोण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल जैसी महत्वाकांक्षी सरकारी योजनाओं के उद्देश्य और उनके क्रियान्वयन को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
आम लोगों का कहना है कि जब सरकारी स्कूलों के छात्र ही इस तरह खुलेआम नियमों की अनदेखी करेंगे, तो समाज में क्या संदेश जाएगा।स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का मानना है कि प्रशासन, पुलिस और स्कूल प्रबंधन को मिलकर इस तरह की घटनाओं पर सख्त कदम उठाने चाहिए। स्कूल स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई, अभिभावकों की जवाबदेही और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता अभियान चलाए जाने की मांग उठ रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।






















