सूरजपुर : जिले में शिक्षा विभाग की लापरवाही और मनमानी अब बच्चों की पढ़ाई पर नहीं, बल्कि उनकी मानसिकता पर सीधे प्रहार करने लगी है.स्कूलों में शिक्षक पढ़ाई नहीं, एक-दूसरे से लड़ने में व्यस्त दिख रहे हैं, और शिक्षा विभाग हाथ पर हाथ धरे तमाशा देख रहा है. ऐसा ही शर्मनाक दृश्य नगर पंचायत जरही स्थित आत्मानंद हायर सेकंडरी स्कूल में देखने को मिला, जहां दो शिक्षिकाएं बच्चों और सहकर्मियों के सामने बाल पकड़कर एक-दूसरे पर टूट पड़ीं.
यह घटना इतनी गंभीर थी कि पूरे स्कूल में अफरा-तफरी मच गई. हॉल में हुई मारपीट से छात्र सहम गए और माहौल कई घंटों तक तनावपूर्ण बना रहा.विवाद बढ़ने पर दोनों शिक्षिकाएं थाने तक पहुंच गईं.जानकारी मिलते ही स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, सांसद प्रतिनिधि और कई अभिभावक मौके पर पहुंचे और बहुत मशक्कत के बाद दोनों पक्षों को सुलह कराने में सफल रहे. पूरे विवाद की शुरुआत एक छात्र से जुड़े मामले से हुई. छात्र की शिकायत पर एक दिन पहले भटगांव पुलिस स्कूल पहुंची थी और पूछताछ की थी.
इसी घटना को लेकर स्पोर्ट्स शिक्षिका का आरोप है कि दूसरी शिक्षिका ने छात्र को उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए भड़काया था. शनिवार को इसी बात पर दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हाथापाई तक पहुंच गया. जो दृश्य सामने आया, उसने पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया. स्कूल स्टाफ का कहना है कि प्रिंसिपल का व्यवहार पक्षपातपूर्ण है, जिससे माहौल दिन-ब-दिन बिगड़ता जा रहा है.कर्मचारियों के बीच खींचतान और पक्षधरता ने स्कूल को अध्ययन केंद्र से ज्यादा विवादों का मंच बना दिया है.
स्थिति यह है कि शिक्षक एक-दूसरे पर विश्वास करने के बजाय आरोप-प्रत्यारोप में लगे रहते हैं, और इसका सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ रहा है. सूत्रों ने यह भी खुलासा किया कि मारपीट में शामिल स्पोर्ट्स शिक्षिका पहले भी SC-ST एक्ट के तहत अन्य शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज करा चुकी हैं. साथी शिक्षक बताते हैं कि वे आए दिन किसी को भी फर्जी मामले में फँसाने की धमकी देती रहती हैं, जिससे जब भी कोई विवाद होता है, पूरा माहौल डर और अनिश्चितता से भर जाता है. पूरे प्रकरण ने प्रतापपुर शिक्षा विभाग की कार्यशैली और मॉनिटरिंग पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.
जिले में जहां पहले से ही पढ़ाई का स्तर गिरता जा रहा है, वहीं शिक्षकों की यह हरकत बच्चों के भविष्य को गहरी चोट पहुँचा रही है. दूसरे जिलों के प्रतिष्ठित संस्थानों में भी इस शर्मनाक घटना की चर्चा होने लगी है, जिससे जिले की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर धब्बा लग रहा है. अब निगाहें जिला शिक्षा विभाग पर हैं कि वह इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह विवाद भी हमेशा की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा और स्कूल बच्चे नहीं, शिक्षकों के झगड़े का अखाड़ा बना रहेगा?























