बलरामपुर : अश्लील गाने पर स्कूली बच्चों की डांस मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। प्राचार्य को सस्पेंड कर दिया गया है। दरअसल गणतंत्र दिवस पर स्कूली बच्चों का भोजपुरी गाने पर डांस का वीडियो वायरल हुआ था। पूरा मामला छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय का है। गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान हुई एक घटना ने शिक्षा विभाग और प्रशासन को कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। 26 जनवरी को आयोजित कार्यक्रम के समापन के बाद विद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं द्वारा एक अश्लील भोजपुरी गीत ‘लहरिया लूटा ए राजा’ पर नृत्य किया गया।
इस दौरान कई अभिभावक भी विद्यालय परिसर में मौजूद थे। कार्यक्रम का वीडियो किसी ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो के वायरल होते ही स्थानीय स्तर पर नाराजगी का माहौल बन गया। लोगों ने सवाल उठाए कि राष्ट्रीय पर्व जैसे गरिमामय अवसर पर इस तरह के गीतों और प्रस्तुतियों को अनुमति कैसे दी गई। मामले को गंभीर मानते हुए बलरामपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) मनीराम यादव ने विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य बसंत गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया और उनसे स्पष्टीकरण मांगा।
बताया जा रहा है कि प्राचार्य की ओर से दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए विस्तृत प्रतिवेदन संयुक्त संचालक शिक्षा, सरगुजा को भेजा। संयुक्त शिक्षा कार्यालय से यह प्रकरण आगे बढ़ाते हुए सरगुजा संभाग के कमिश्नर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए नरेंद्र कुमार दुग्गा, कमिश्नर सरगुजा संभाग ने तत्काल प्रभाव से प्रभारी प्राचार्य बसंत गुप्ता को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय संयुक्त शिक्षा कार्यालय, अंबिकापुर निर्धारित किया गया है।
जानकारी के अनुसार, बसंत गुप्ता का मूल पद लेक्चरर (एलबी) का है और वे वर्तमान में विद्यालय में प्रभारी प्राचार्य के रूप में पदस्थ थे। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, विद्यालय में आयोजित किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम की जिम्मेदारी प्राचार्य और संबंधित शिक्षकों की होती है। कार्यक्रमों के चयन, गीतों और प्रस्तुतियों की समीक्षा तथा अनुशासन बनाए रखना विद्यालय प्रबंधन का दायित्व है। ऐसे में इस प्रकार की लापरवाही को गंभीर कदाचार माना गया है। गौरतलब है कि यह पहला अवसर नहीं है जब प्रदेश के स्कूलों में अनुशासनहीनता से जुड़े मामले सामने आए हों।
हाल ही में राज्य के विभिन्न जिलों से फेयरवेल पार्टी के बाद छात्रों द्वारा वाहनों में स्टंट करने के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। उन मामलों में भी प्रशासन ने छात्रों और संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विद्यालयों में सांस्कृतिक गतिविधियों की निगरानी और नियंत्रण को लेकर क्या पर्याप्त सावधानी बरती जा रही है। राष्ट्रीय पर्व जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर कार्यक्रमों की गरिमा बनाए रखना न केवल विद्यालय प्रशासन, बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।






















