दुर्ग : दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल बीमारी से पीड़ित एक युवती की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि अस्पताल के ब्लड बैंक में ‘ओ पॉजिटिव’ रक्त समूह की 85 यूनिट रक्त उपलब्ध होने के बावजूद पीड़िता को समय पर एक यूनिट खून नहीं मिल सका। मामले में लापरवाही पाए जाने के बाद 9 स्वास्थ्य कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है।
जानकारी के अनुसार, सिकलिंग पीड़िता दीपिका को गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार उसे तत्काल रक्त चढ़ाने की आवश्यकता थी, लेकिन परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन डोनर लाने की शर्त पर अड़ा रहा। इस दौरान युवती के पिता रक्तदाता की तलाश करते रहे और इलाज में देरी होती गई।
कलेक्टर ने गठित की थी जांच टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। जांच टीम ने अस्पताल की कार्यप्रणाली, ब्लड बैंक रिकॉर्ड और उपचार प्रक्रिया की समीक्षा की। जांच रिपोर्ट में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से कई स्तरों पर गंभीर लापरवाही और “अक्षम्य चूक” पाए जाने की बात सामने आई है।
9 कर्मचारियों को नोटिस
रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने 9 स्वास्थ्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी संबंधित कर्मचारियों से 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है। अधिकारियों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन से जुड़े निर्धारित प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन नहीं किया गया, जिसके कारण मरीज को समय पर आवश्यक उपचार नहीं मिल सका।
नियमों की आड़ में गई एक जान
परिजनों का आरोप है कि ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में रक्त उपलब्ध होने के बावजूद प्रक्रियात्मक नियमों का हवाला देकर मरीज को रक्त नहीं दिया गया। नतीजतन इलाज में देरी हुई और युवती ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और आपातकालीन परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे की कार्रवाई संभव
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित कर्मचारियों के जवाब मिलने के बाद आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं।























