कराची : ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले में देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। रविवार को अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
पुलिस के अनुसार, वाणिज्य दूतावास के आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी इकट्ठा हो गए थे। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और चेतावनी स्वरूप हवा में गोलियां चलाईं। इसके बावजूद स्थिति कुछ समय तक तनावपूर्ण बनी रही। ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ईधी इन्फॉर्मेशन’ ने पुष्टि की कि माई कोलाची रोड के पास हुई गोलीबारी और झड़पों में 10 लोगों की जान गई।
कई घायलों को तत्काल सिविल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। सिंध के गृह मंत्री जियाउल हसन लंजार ने कराची के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक से तत्काल विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर सुरक्षा बढ़ाने और यातायात को सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित करने के निर्देश दिए गए।
पुलिस के मुताबिक, शिया संगठनों ने खामेनेई की मौत के विरोध में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक मार्च निकालने की घोषणा की थी। वर्ष 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता रहे खामेनेई की शनिवार को अमेरिका-इजराइल हमलों में मौत की खबर सामने आई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी, जिसके कुछ घंटे बाद ईरान के सरकारी टेलीविजन ने भी इसकी पुष्टि की।
भारत में झुका आधा ईरानी झंडा
इजरायल और अमेरिकी हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मौत की ऑफिशियल सूचना के बाद, नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने सम्मान और शोक के साथ अपना झंडा आधा झुका दिया। दूतावास में तैनात ईरानी अधिकारियों के बीच शोक का माहौल भी है।
इस बारें में भारत में ईरानी दूतावास ने शनिवार को बयान जारी कर इज़रायल और अमेरिका की “अपमानजनक” मांगों के आगे हथियार डालने या आत्मसमर्पण करने की किसी भी संभावना को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था। दूतावास ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने इज़राइल की “भ्रष्ट ज़ायोनी सरकार” के सहयोग से ईरान में हवाई हमले किए, जिनमें नागरिक बुनियादी ढांचा सहित “कुछ खास स्थानों” को निशाना बनाया गया।
दूतावास के बयान में आगे कहा गया है कि तेहरान और अन्य शहरों में ये हवाई हमले आने वाले दिनों में भी जारी रहने की आशंका है। बयान में कहा गया, “आज सुबह ईरान के साहसी राष्ट्र ने संयुक्त राज्य अमेरिका की क्रूर सरकार द्वारा भ्रष्ट ज़ायोनी सरकार के सहयोग से किए गए हवाई हमले को देखा, जिसमें देश के कुछ खास स्थानों को निशाना बनाया गया। यह दुर्भावनापूर्ण कृत्य एक बार फिर वार्ता के दौरान हुआ, जो यह दर्शाता है कि दुश्मन की यह गलत धारणा कि ईरान आत्मसमर्पण करेगा, पूरी तरह विफल है।”
अपने नागरिकों के लिए की खास अपील
दूतावास ने अपने नागरिकों से शांत रहने की अपील की और इज़राइल एवं अमेरिका की “आक्रामकता” से सुरक्षित क्षेत्रों की यात्रा करने की सलाह भी दी। इसके अलावा, ईरान की इस्लामी गणराज्य सरकार ने समाज की सभी आवश्यक जरूरतों की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अग्रिम व्यवस्था कर ली है, इसलिए खाद्य और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं होगी।
नागरिकों से यह भी कहा गया है कि वे खरीदारी केंद्रों में अनावश्यक भीड़ न लगाए, क्योंकि इससे जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं। इस बीच, जारी तनाव के कारण ईरान में स्कूल और विश्वविद्यालय बंद कर दिए गए हैं, जबकि बैंक सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। सरकारी कार्यालय फिलहाल 50 प्रतिशत क्षमता के साथ कार्यरत हैं।






















