कोरबा : कोरबा में पुलिस वेरिफिकेशन के नाम पर चल रहे अवैध वसूली का भांडा आखिर फूट ही गया। रिश्वतखोरी की शिकायत के बाद एसपी ने हेड कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि निलंबित हेड कांस्टेबल लंबे समय से उद्योगों में काम करन वाले कामगारों के साथ ही अन्य अभ्यर्थियों से पुलिस वेरिफिकेशन के नाम पर पैसों की अवैध वसूली कर रहा था। जिसकी शिकायत मिलने के बाद एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने आज हेड कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक ये पूरा मामला कोरबा एसपी कार्यालय में स्थित चरित्र सत्यापन विभाग का है। यहां चरित्र सत्यापन के कार्य के लिए हेड कांस्टेबल सूर्यकांत द्विवेदी की की पोस्टिंग थी। ढोढीपारा निवासी दीपक साहू ने हेड कांस्टेबल के खिलाफ सिविल लाइन थाना में लिखित शिकायत की थी। उसने आरोप लगाया था कि चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन के बदले कार्यालय में मौजूद अधिकारी द्वारा उससे एक हजार रुपए की मांग की जा रही है। उसने बताया कि वह रायगढ़ में एनटीपीसी संयंत्र में हाइड्रा का आपरेटर है।
गेट पास रिन्यूअल के लिए ठेका कंपनी ने उसे पुलिस वेरिफिकेशन प्रमाण पत्र लाने का निर्देश दिया था। जिसके बाद वह कोरबा एसपी कार्यालय में चरित्र प्रमाण पत्र के लिए आवेदन जमा करने पहुंचा। यहां पदस्थ प्रधान आरक्षक सूर्यकांत द्विवेदी ने उससे चरित्र प्रमाण पत्र बनाने के एवज में एक हजार रुपए की मांग की। हेड कांस्टेबल ने पैसे देने पर तत्काल प्रमाण पत्र बना देने की बात कही गई। लेकिन दीपक साहू ने रिश्वत ने देकर इसकी लिखित शिकायत सिविल लाइन थाने में कर दी।

शिकायत की गंभीरता को देखते हुए उप निरीक्षक प्रमोद चंद्राकर ने मामले की जांच की। जांच के दौरान आवेदक दीपक साहू ने अपने बयान में शिकायत की बातों की पुष्टि की। पहचान पंचनामा के दौरान आवेदक ने प्रधान आरक्षक सूर्यकांत द्विवेदी को पहचानते हुए बताया कि उसी ने 1000 रुपए की मांग की थी। जांच में आरोप सही पाए जाने पर एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने तत्काल प्रधान आरक्षक सूर्यकांत द्विवेदी को निलंबित कर दिया है।
पैसे लेकर बगैर जांच के ही धड़ल्ले से जारी किये चरित्र प्रमाण पत्र
एसपी कार्यालय में चरित्र सत्यापन के नाम पर पैसों की अवैध वसूली पर भले ही एसपी ने शिकायत के बाद हेड कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया है। पुलिस सूत्रों की माने तो निलंबित हेड कांस्टेबल के पुराने रिकार्ड को खंगाला जाये तो बालको, लैंको, एनटीपीसी और एसईसीएल में ठेका कंपनी में काम करने वाले ऐसे सैकड़ों श्रमिक है, जिन्हे जिले के थानों से आपराधिक रिकार्ड जांच के बगैर ही पैसों के दम पर चरित्र प्रमाण पत्र जारी कर दिये गये।
चरित्र प्रमाण पत्र के एवज में थाना स्तर से लेकर एसपी कार्यालय में पदस्थ हेड कांस्टेबल द्वारा बड़ा खेल खेला जा रहा था। ऐसा नही है कि इसकी जानकारी पुलिस विभाग में किसी को नही थी, लेकिन कोई भी सामने आने को तैयार नही था। ऐसे में यदि कोरबा जिले में संचालित संयंत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को पुलिस विभाग से जारी चरित्र प्रमाण पत्रों की जांच करायी जाये, तो कई थानेदार पर संकट के बादल मंडराने लगेंगे।























