मुंबई : मुंबई का गणेशोत्सव अपनी भव्यता और भक्ति के लिए विश्व प्रसिद्ध है। शहर में गणेश चतुर्थी के अवसर पर जगह-जगह पंडाल सजाए गए हैं, लेकिन माटुंगा के किंग्स सर्कल में स्थित जीएसबी सेवा मंडल का गणपति पंडाल सबसे खास है। पिछले सात दशकों से यहां गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है, और हर साल बप्पा का वैभव नई ऊंचाइयों को छूता है।
474.46 करोड़ का बीमा
इस बार विघ्नहर्ता गणपति को 267 किलो सोने और 336 किलो चांदी के आभूषणों से सजाया गया है, जिनकी बाजार कीमत लगभग 67 करोड़ रुपये है। बप्पा का सिंहासन भी 350 किलो चांदी से तैयार किया गया है, जो भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देता है। जीएसबी सेवा मंडल ने इस साल 474.46 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बीमा कराया है, जो पिछले साल के 400 करोड़ से काफी अधिक है। यह बीमा आभूषणों, पंडाल, भक्तों की सुरक्षा, स्वयंसेवकों, पुजारियों और आपदा कवर (आग, भूकंप) को शामिल करता है।
लालबाग के राजा के बाद जीएसबी गणपति पंडाल में सबसे अधिक भीड़ उमड़ती है। मुंबई के साथ-साथ देशभर से श्रद्धालु बप्पा का आशीर्वाद लेने आते हैं। मंडल की ओर से 24 घंटे प्रसाद और भोजन की व्यवस्था की जाती है, जिसे भक्त बप्पा का आशीर्वाद मानकर ग्रहण करते हैं। जीएसबी की अनोखी परंपराएं भी इसे विशेष बनाती हैं। ‘तुलाभार’ अनुष्ठान में भक्तों को खाद्य सामग्री से तोला जाता है, जिसे बाद में दान कर दिया जाता है।
‘मढ़स्थान’ में केले के पत्तों पर भोजन लौटाया जाता है, और सुबह की पूजा के बाद नारियल तोड़कर प्रसाद बांटा जाता है। पर्यावरण के प्रति जागरूकता दिखाते हुए, मूर्ति शाडू मिट्टी से बनाई जाती है और पारंपरिक दक्षिण भारतीय वाद्य यंत्रों से पूजा होती है। 70 साल पुरानी इस परंपरा ने जीएसबी गणपति को श्रद्धा और समृद्धि का प्रतीक बनाया है। भक्त यहां मन्नत मांगने और जीवन में खुशहाली की कामना करने आते हैं।






















