रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने राज्य का आर्थिक सर्वेक्षण सदन में पेश किया। सर्वेक्षण में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत और तेज़ी से बढ़ती हुई बताते हुए आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। सरकार का दावा है कि विभिन्न विकासात्मक योजनाओं और नीतियों का असर आर्थिक गतिविधियों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
वित्त मंत्री ने सदन को जानकारी देते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) लगभग 6.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। राज्य की आर्थिक वृद्धि दर 11.57 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है, जिसे सरकार विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रही है। उन्होंने कहा कि निवेश आधारित विकास मॉडल, आधारभूत संरचना में सुधार और सरकारी योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे रहा है।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य की अर्थव्यवस्था तीनों प्रमुख क्षेत्रों—कृषि, उद्योग और सेवा—में संतुलित वृद्धि की ओर बढ़ रही है। कृषि क्षेत्र में वर्ष 2025-26 के लिए 12.53 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। वहीं वर्ष 2024-25 में कृषि क्षेत्र ने 11.76 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। सरकार का कहना है कि किसान हितैषी योजनाएं, उत्पादन बढ़ाने वाली नीतियां और कृषि क्षेत्र में किए गए सुधारों से यह सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है।
उद्योग क्षेत्र के संबंध में सर्वेक्षण में 10.26 प्रतिशत वृद्धि की संभावना जताई गई है। पिछले वित्तीय वर्ष में यह वृद्धि दर 9.91 प्रतिशत रही। वित्त मंत्री ने औद्योगिक निवेश, नए प्रोजेक्ट्स और आधारभूत ढांचे में सुधार को इस वृद्धि का प्रमुख कारण बताया। उनका कहना है कि राज्य में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है, जिससे औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आई है।
सेवा क्षेत्र को लेकर भी सर्वेक्षण में उत्साहजनक आंकड़े सामने आए हैं। वर्ष 2025-26 में सेवा क्षेत्र में 13.15 प्रतिशत की तेज़ बढ़त का अनुमान है। वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र ने 10.08 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी। सरकार के अनुसार आईटी, व्यापार, परिवहन और अन्य सेवा गतिविधियों के विस्तार से यह क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है।
स्थिर कीमतों (स्थिर भावों) पर राज्य की अर्थव्यवस्था में 8.11 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया गया है। वहीं प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,79,244 रुपये होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10.07 प्रतिशत अधिक है। सरकार का कहना है कि यह आंकड़ा प्रदेश में आय के अवसरों और आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी का संकेत देता है।
हालांकि आर्थिक सर्वेक्षण पेश होते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकारी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण में प्रस्तुत आंकड़े जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।






















