Raipur

CG Vidhansabha : शिक्षा मंत्री को नहीं मिला जवाब देने का मौका, हंगामे की भेंट चढ़ गया प्रश्नकाल, सदन में पोस्टरबाजी पर बवाल

रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा का आज का प्रश्नकाल पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ गया। सदन में शिक्षा, वित्त, गृह और वन मंत्री के विभागों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न सूचीबद्ध थे, लेकिन लगातार व्यवधान और विरोध-प्रदर्शन के कारण एक भी प्रश्न पर चर्चा नहीं हो सकी। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के चलते विधानसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।

कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी कांग्रेस विधायक अपने शरीर पर पोस्टर और तख्तियां चिपकाकर सदन के भीतर पहुंचे। इसे लेकर सत्ता पक्ष की ओर से पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि इस तरह शरीर पर पोस्टर चिपकाकर सदन में आना संसदीय मर्यादा और परंपराओं के खिलाफ है। अजय चंद्राकर की आपत्ति पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने तत्काल संज्ञान लिया और विपक्ष को संसदीय नियमों का पालन करने की हिदायत दी। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रश्नकाल सदन का अत्यंत महत्वपूर्ण समय होता है और इसे किसी भी स्थिति में बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने विपक्षी विधायकों से आग्रह किया कि वे अपने शरीर पर चिपकाए गए पोस्टर और तख्तियां हटाकर ही सदन में प्रवेश करें। अध्यक्ष के निर्देश के बावजूद विपक्ष अपने रुख पर अड़ा रहा, जिसके कारण पहले प्रश्नकाल को 10 मिनट के लिए स्थगित किया गया। इसके बाद जब कार्यवाही पुनः शुरू हुई, तब भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। विपक्षी विधायक फिर से तख्तियां लेकर सदन में पहुंचे, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने एक बार फिर कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। लगातार व्यवधान को देखते हुए बाद में प्रश्नकाल को 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने दो टूक कहा कि जब तक विपक्ष अपने शरीर पर लगाए गए पोस्टर हटाकर सदन में नहीं आएगा, तब तक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार की गई व्यवस्था और अपील के बावजूद विपक्ष का अड़ियल रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है, जिससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है। इस हंगामे का सबसे बड़ा असर प्रश्नकाल पर पड़ा। आज पहली बार शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को सदन में प्रश्नों के उत्तर देने थे, लेकिन हंगामे के चलते उन्हें जवाब देने का अवसर ही नहीं मिल सका। विपक्ष और सत्ता पक्ष के टकराव के कारण जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पाई और पूरा प्रश्नकाल बिना किसी कार्यवाही के समाप्त हो गया।

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