जांजगीर-चांपा : करही गांव में हुए तिहरे हत्याकांड के बाद पीड़ित परिवारों के दर्द को कम करने के लिए जांजगीर-चांपा पुलिस ने एक मानवीय और सराहनीय कदम उठाया है। पुलिस अधीक्षक (SP) विजय कुमार पाण्डेय ने पीड़ित परिवारों की बेटियों की शिक्षा का जिम्मा अपने हाथ में लिया है। यह पहल न केवल पुलिस विभाग की संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि समाज में पुलिस की सकारात्मक और सहयोगी भूमिका का भी उदाहरण पेश करती है।
इस पहल के तहत मृतक महेंद्र बघेल की नन्ही बेटी मायरा का एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम स्कूल में दाखिला कराया गया। पुलिस विभाग ने उसकी वार्षिक फीस और परिवहन शुल्क का भुगतान किया है, ताकि मायरा की पढ़ाई बिना किसी व्यवधान के जारी रह सके। इसके साथ ही, मृतक मनोज कश्यप की बेटी सोनिया, जो इस समय स्नातक की पढ़ाई कर रही है, को भी उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया गया है। पुलिस विभाग ने उसके लिए आवश्यक किताबें, कॉपी और बैग उपलब्ध कराए हैं और आगे की पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद देने का आश्वासन भी दिया है।
एसपी विजय कुमार पाण्डेय स्वयं पीड़ित परिजनों से मिलने पहुंचे और उनके दुख को साझा किया। उन्होंने कहा कि पुलिस सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपने कर्तव्य निभाने के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि पीड़ित परिवारों को आगे भी हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। ग्राम करही के निवासियों ने पुलिस की इस पहल का स्वागत किया है। ग्रामीणों ने इसे सामुदायिक पुलिसिंग का सकारात्मक उदाहरण बताया और कहा कि इस तरह की पहल से पुलिस और जनता के बीच विश्वास और सहयोग की भावना और मजबूत होगी।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के कदम से अपराध से प्रभावित परिवारों को नया जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ा सहयोग है, क्योंकि इससे उनका भविष्य सुरक्षित होता है और वे समाज की मुख्यधारा में वापस लौट पाते हैं। पुलिस विभाग की यह पहल न केवल कानून-व्यवस्था की दृष्टि से बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह संदेश देती है कि प्रशासन केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवारों के पुनर्वास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।






















