रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही खाद-बीज संकट पर जबरदस्त हंगामे का गवाह बना। सदन में शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्यभर में उर्वरक की भारी कमी का मुद्दा उठाया और कहा कि किसान मजबूरी में बाजार से दोगुनी कीमत पर खाद खरीद रहे हैं। उन्होंने 23 विधायकों के समर्थन से स्थगन प्रस्ताव पेश कर इस गंभीर विषय पर तत्काल चर्चा की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वह किसानों को राहत देने में पूरी तरह विफल रही है। मगर आसंदी ने कृषि मंत्री रामविचार नेताम के वक्तव्य के बाद स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य करार दे दिया। इससे नाराज़ विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह तक पहुंच गए, जिससे सदन की कार्यवाही को 5 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा।
कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने गर्भगृह में विरोध करने पर कांग्रेस विधायकों को दिनभर के लिए निलंबित कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक विधानसभा परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए और सरकार को “किसान-विरोधी” करार दिया।
हालांकि कुछ समय बाद अध्यक्ष ने निलंबन समाप्त कर दिया, लेकिन लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को मंगलवार, 15 जुलाई को सुबह 11 बजे तक स्थगित करना पड़ा। इस तेज़तर्रार शुरुआत ने साफ कर दिया है कि यह मानसून सत्र खासा तूफानी रहने वाला है। किसानों की समस्याएं, खाद-बीज की आपूर्ति और प्रशासनिक नीतियों पर विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की रणनीति में है।






















