बलरामपुर : बलरामपुर जिले विवाहिता और नाबालिग भतीजी के साथ गैंगरेप के मामले में पुलिस की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में आ गयी है। बताया जा रहा है कि गैंगरेप की घटना के बाद पीड़ित विवाहिता ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। बावजूद इसके इस मामले में पुलिस ने गैंगरेप का अपराध दर्ज नही किया गया। घटना के करीब 3 महीने बाद अब इस मामले में अपराध दर्ज किया गया है। जिस पर आईजी ने निर्देश पर थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर एएसआई को सस्पेंड कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक ये पूरा मामला बलरामपुर जिले के सनावल थाना क्षेत्र का है। यहां 7 सितंबर 2025 को गांव में रहने वाली 25 वर्षीय विवाहिता अपनी 14 वर्षीय भतीजी के साथ लकड़ी लेने की बात कहकर जंगल गई थी। जंगल में दोनों के साथ तीन युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। इनमें झारखंड के गढ़वा जिले के बरडीहा थाना क्षेत्र के ग्राम के कुसुमीयादामर निवासी सैयद अंसारी, फैयाज अंसारी और साजिद अंसारी शामिल थे। घटना के बाद आरोपियों ने विवाहिता और नाबालिग को घटना की जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी दिया था।
इस घटना के बाद पीड़ित विवाहिता ने उसी रात घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आठ सिंतबर को पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया था। वहीं इस घटना पर परिजनों मृतिका के साथ गैंगरेप होने की शिकायत की थी। मृतिका के पिता ने पुलिस को बताया था कि झारखंड के युवकों ने उसकी बेटी को मोबाइल पर फोन कर मिलने के लिए बुलाया था। जहां बेटी और नाबालिग बच्ची के साथ गलत काम हुआ। लेकिन पुलिस ने इस प्रकरण में तत्काल एफआइआर दर्ज न कर जांच के नाम पर मामले को उलझाये रखा। वहीं एसडीओपी स्तर पर भी गैंगरेप की इस घटना की बारीकी से छानबीन नहीं की गई।
एक ही मामले में दो FIR होने पर IG ने पकड़ा मामला, गंभीर लापरवाही पर लिया एक्शन
सरगुजा पुलिस रेंज के सभी जिलों से थानावार दर्ज होने वाले अपराधिक प्रकरणों की जानकारी पुलिस आईजी कार्यालय पहुंचती है। आइजी दीपक कुमार झा स्वयं इन प्रकरणों की समीक्षा करते हैं। 3 दिसंबर को सनावल थाने में एक ही प्रकरण से जुड़े दो आपराधिक प्रकरण पंजीकृत मिले थे। सामूहिक दुष्कर्म और आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के एफआइआर को देखकर आइजी ने बलरामपुर जिले के पुलिस अधिकारियों से इस मामले की पूछताछ की। प्रारंभिक पूछताछ के बाद अपराध की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने केस डायरी के साथ उपस्थित होने आदेशित किया।
आईजी दीपक कुमार झा ने जब केस डायरी का अवलोकन किया तो सनावल थाना पुलिस की ओर से गंभीर प्रकरण के बाद भी जांच में देरी सामने आई। इसके कारण पर्याप्त साक्ष्यों के संकलन में भी लापरवाही उजागर हुई। पुलिस घटना के तत्काल बाद यदि बारीकी से जांच करती तो एफआईआर में इतना विलंब नहीं होता। अपराधी भी तत्काल पकड़ में आ सकते थे। प्रारंभिक जांच में ही सनावल पुलिस को सामूहिक दुष्कर्म और आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के तथ्य आ चुके थे।
आईजी दीपक कुमार झा ने इस लापरवाही के लिए सनावल थाने में पदस्थ एएसआई रोशन लकड़ा को निलंबित करने के साथ ही थाना प्रभारी गजपति मिर्रे को लाइन अटैच कर दिया है। ऐसे मामलों की जांच एसडीओपी के पर्यवेक्षण में होती है। उन्होंने भी इसमें गंभीरता कैसे नहीं दिखाई, इसकी जांच के भी निर्देश आइजी ने दिए हैं। आईजी की सख्ती से बलरामपुर जिले के पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों में खलबली मची हुई है।






















