नई दिल्ली : आज के इस दौर में बच्चों को स्मार्टफोन, इंटरनेट और सस्ते डेटा ने ऐसी लत लगा दी है कि बच्चे अब बिना मोबाइल और इंटरनेट के नहीं रह सकते। हालत ऐसी हो गई है कि अब कम उम्र के बच्चों को पोर्न देखने की आदत लग रही है। इसी बीच अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। जो पालकों के लिए राहत भरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि टेक्सास पोर्न वेबसाइटों पर यूजर्स की उम्र की जांच करवा सकता है।
दरअसल, जस्टिस क्लेरेंस थॉमस की अगुआई में कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से टेक्सास के उस कानून को सही ठहराया। थॉमस ने कहा कि पोर्न वेबसाइटों को एक्सेस करने से पहले यूज़र की उम्र की जांच हो। इस कानून के अनुसार एडल्ट वेबसाइटों को यूजर्स की उम्र वेरिफाई करनी होगी। इस कानून में कहा गया है कि अगर किसी भी वेबसाइट ज्यादा कंटेंट ऐसा है जो बच्चों के लिए लाभदायक नहीं है, तो उसे यूजर्स की उम्र 18 साल से ज्यादा होनी चाहिए।
वहीं दूसरी ओर इस केस में जस्टिस एलेना कगन ने अपनी राय रखी है। उन्होंने जस्टिस सोनिया सोटोमयोर और केतनजी ब्राउन जैक्सन के साथ असहमति जताई। कगन ने कहा कि इस तरह की सख्ती से फ्री स्पीच यानी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बच्चों को अश्लील कंटेंट से बचाना जरूरी है, लेकिन पोर्न देखने वालों से उनकी आईडी मांगना सही नहीं है। इससे यूज़र्स के प्राइवेसी अधिकार खतरे में पड़ सकते हैं।






















