बिलासपुर : बिलासपुर से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने आरक्षक शिवकुमार सायतोड़े की बर्खास्तगी को निरस्त करते हुए उनकी सेवा बहाल करने का आदेश दिया है। साथ ही, कोर्ट ने विभाग को निर्देश दिया है कि उन्हें 50 प्रतिशत बैक वेतन भी दिया जाए। यह मामला उस समय सामने आया था जब आरक्षक शिवकुमार सायतोड़े के खिलाफ उनकी पत्नी ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरक्षक ने शराब के नशे में उनके साथ मारपीट की। इस शिकायत के आधार पर विभागीय जांच शुरू की गई थी, जिसके बाद पुलिस विभाग ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था। आरक्षक ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। मामले की सुनवाई जस्टिस ए.के. प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विभागीय जांच प्रक्रिया का गहराई से परीक्षण किया और पाया कि जांच में कई गंभीर त्रुटियां थीं।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि विभागीय जांच निष्पक्ष और विधिसम्मत तरीके से नहीं की गई थी। जांच प्रक्रिया में उचित साक्ष्यों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते बर्खास्तगी का आदेश न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत और विभाग के आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करते समय विभाग को निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करना चाहिए।
यदि जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता नहीं होगी, तो ऐसी कार्रवाई अदालत में टिक नहीं पाएगी। इस फैसले के तहत कोर्ट ने शिवकुमार सायतोड़े की सेवा बहाल करने के साथ-साथ उन्हें 50 प्रतिशत बैक वेतन देने का भी निर्देश दिया है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि वेतन भुगतान सेवा बहाली की तिथि और अन्य शर्तों के अनुसार किया जाएगा। इस फैसले को पुलिस विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते समय विधिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।






















