कोरबा : छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के एक निजी न्यूज चैनल के शो में दिये बयान ने सियासी घमासान मचा दिया है। जयसिंह अग्रवाल ने बेबाक बयान देते हुए अपनी ही पूर्ववर्ती सरकार के साथ-साथ मौजूदा बीजेपी सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिये। उन्होने कहा कि… मैं खुद मंत्री था…इसलिए मैं मुख्यमंत्री पे भी भारी था, इसलिए मैं अपने आप में सक्षम था। और मैंने लाख कोशिशों और रोकने के बावजूद मेडिकल कालेज खुलवाया, आत्मानंद स्कूल, आत्मानंद कालेज, आईटीआई और केंद्रीय विद्यालय खुलवाया।
जयसिंह अग्रवाल के इस बयान की माने, तो जनहित के कार्यो में उन्ही की सरकार रोढ़ा अटका रही थी। कोरबा में आयोजित न्यूज चैनल के शो में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के इस बयान ने एक बार फिर जहां कांग्रेस पार्टी की एकजुटता की पोल खोल दी है, वहीं पार्टी में व्याप्त गुटबाजी को एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर सामने ला दिया है। गौरतलब है कि छत्तीसढ़ की सत्ता से करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी विपक्ष में है। चुनाव हारने के दो साल बाद भी कांग्रेस पार्टी के कई नेता ऐसे है, जिन्हे उनकी हार की मुख्य वजह पार्टी में व्याप्त गुटबाजी और साजिश ही लगती है।
यहीं वजह है कि पार्टी के ऐसे नेता सार्वजनिक मंच पर अपना दर्द और हकीकत जाहिर करने में संकोच नही करते। कुछ ऐसा ही नजारा एक दिन पहले कोरबा में देखने को मिला। यहां एक निजी टीवी न्यूज चैनल के शो में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल का दिया बयान अब चर्चा का विषय बना हुआ है। शो के दौरान शहर के विकास और दुर्दशा के मुद्दे पर अग्रवाल ने बेबाकी के साथ अपने कार्यकाल में किये गये कार्यो को गिनाया। इसके साथ ही उन्होने अपनी तकलीफ भी बताई कि कैसे जिले के विकास के लिए किये जा रहे कार्यो पर उन्ही की सरकार न रोढ़ा भी अटकाया।
जिले में संचालित मेडिकल कालेज की लड़ाई को जयसिंह अग्रवाल ने अपनी लड़ाई बताते हुए कहा कि….मेडिकल कालेज खोलने को लेकर उन्होने काफी प्रयास किया, लेकिन उसे रोकने की लाख कोशिशे की गयी। बावजूद इसके उन्होने लड़कर कोरबा में मेडिकल कालेज खुलवाया। इसी तरह आत्मानंद स्कूल-कालेज के साथ ही आईटीआई और केंद्रीय विद्यालय खुलवाये। शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए एसईसीएल से 300 करोड़ रूपये का फंड दिलाया। लेकिन सड़क निर्माण के कार्य पर भी प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के कारण आज तक पूरे नही हो सके है।
खैर विकास की धीमी रफ्तार की वजह जो भी हो, लेकिन सच्चाई तो यही है कि सत्ता और पद मिलने के बाद राजनेताओं को क्षेत्र से ज्यादा अपने विकास की चिंता रहती है। फिर चाहे सरकार कांग्रेस की हो…..या फिर बीजेपी की। दोनों ही सरकार के मंत्रियों के दावों और जमीनी हकीकत को क्षेत्र की जनता देख और परख रही है।
…तो क्या मुख्यमंत्री पर भारी पड़ना जयसिंह अग्रवाल को पड़ गया भारी ?
टीवी शो में जयसिंह अग्रवाल ने बड़ी ही बेबाकी के साथ अपने और मौजूदा बीजेपी सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाये। उन्होने अपनी पूर्ववर्ती सरकार और मौजूदा सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि….ये कोरबा जिले का दुर्भाग्य रहा कि यहां दोनों सरकार में छांट-छांटकर नमूने किसम के अधिकारी भेजे जाते है। उन्होने कोरबा एसपी के दावे पर सवाल उठाते हुए कह दिया कि पूर्ववर्ती सरकार में खदानों से डीजल-कोयले की चोरी खुलेआम चल रही थी, और आज भी जारी है। हमने अपनी सरकार में इस चीज का विरोध किया और आज हम उस ढंग से विरोध नही कर पा रहे क्योंकि हम विधायक नही है।
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने लाइव शो में यहां तक कह दिया कि मैं खुद मंत्री था…..इसलिए मुख्यमंत्री पर भारी था! जयसिंह अग्रवाल के इस बयान के बाद अब ये चर्चा गर्म है कि क्या मुख्यमंत्री पर भारी पड़ना ही जयसिंह अग्रवाल को भारी पड़ गया ? ये बात किसी से भी नही छिपी है कि पूर्व सीएम बघेल और जयसिंह अग्रवाल के बीच मौजूदा वक्त में राजनीतिक रिश्ते अच्छे नही है। ऐसे में जयसिंह अग्रवाल के इस बयान ने एक बार फिर पार्टी के अंदर व्याप्त खींचतान और अंतर्कलह को सार्वजनिक मंच पर ला दिया है।






















