शिलांग : मेघालय सरकार ने लंबे समय से संविदा पर कार्यरत नर्सों और पैरामेडिक कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। राज्य मंत्रिमंडल ने बीतें दिनों वर्ष 2008 से 2012 के बीच नियुक्त 221 संविदा नर्सों और पैरामेडिक कर्मियों की सेवाओं को नियमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने बताया कि इन कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर पहले दोबारा भर्ती का प्रस्ताव था, क्योंकि 2007 के बाद की गई कई नियुक्तियों को तदर्थ माना जा रहा था। इस सूची में स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारी भी शामिल थे।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा, संविदा कर्मचारियों से परामर्श और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि इन नर्सों और पैरामेडिक कर्मियों की भर्ती निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की गई थी। इसी आधार पर कैबिनेट ने उनकी नियुक्तियों को वैध मानते हुए नियमित करने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस फैसले के बाद संबंधित पदों पर नई भर्ती की आवश्यकता नहीं होगी। इस निर्णय से वर्षों से संविदा पर कार्य कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों को स्थायित्व मिलेगा और उनके भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त होगी।
मानसिक स्वास्थ्य सेवा नियमों को भी मंजूरी
इन पदों के लिए अब नई भर्ती की आवश्यकता नहीं होगी। मंत्रिमंडल ने मेघालय मानसिक स्वास्थ्य सेवा नियमों को भी मंजूरी दे दी, जो मानसिक स्वास्थ्य सेवा, पुनर्वास और संबद्ध गतिविधियों से संबंधित संस्थानों के लिए एक नियामक ढांचा प्रदान करेंगे। इसने मेघालय न्यायिक सेवा नियम 2006 और मेघालय उच्चतर न्यायिक सेवा नियम 2015 में संशोधन को भी हरी झंडी दे दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका की सिफारिशों के आधार पर न्यायिक सेवा के अभ्यर्थियों के लिए अब खासी या गारो भाषा का ज्ञान अनिवार्य होगा। जल जीवन मिशन के तहत 700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी करने में देरी पर संगमा ने कहा कि भारत सरकार ने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनिवार्य किए गए राष्ट्रव्यापी ऑडिट लंबित रहने तक सभी राज्यों को भुगतान रोक दिया है।






















