रायपुर : बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक, विजयादशमी या दशहरा का त्योहार हर साल पूरे देश में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार भगवान राम की रावण पर विजय और माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध का प्रतीक है। इस दिन शस्त्र पूजा और शमी वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं कि साल 2025 में दशहरा किस दिन मनाया जाएगा, साथ ही इसके शुभ मुहूर्त और योग क्या होंगे।
दशहरा 2025 की तारीख
साल 2025 में दशहरा का पावन पर्व बुधवार, 1 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह पर्व नवरात्रि के नौ दिनों के बाद आता है, जो दसवें दिन पड़ता है। इस दिन रावण दहन के साथ-साथ जगह-जगह रामलीला का मंचन भी किया जाता है।
शुभ मुहूर्त और योग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन कुछ खास मुहूर्त में पूजा और कार्य करना बहुत शुभ माना जाता है।
- दशमी तिथि का प्रारंभ: दशमी तिथि 30 सितंबर 2025, मंगलवार को रात 08:31 बजे से शुरू होगी।
- दशमी तिथि का समापन: दशमी तिथि 1 अक्टूबर 2025, बुधवार को शाम 06:15 बजे समाप्त होगी।
- विजय मुहूर्त: दशहरा के दिन दोपहर में विजय मुहूर्त होता है, जो सभी शुभ कार्यों के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस साल विजय मुहूर्त दोपहर 01:58 बजे से दोपहर 02:45 बजे तक रहेगा।
- अमृत काल: 1 अक्टूबर 2025 को अमृत काल सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा। यह भी एक बेहद शुभ समय है।
पूजा विधि और महत्व
दशहरा के दिन शस्त्र पूजा का विशेष महत्व है, खासकर क्षत्रिय समुदाय में। इस दिन लोग अपने औजारों और हथियारों की पूजा करते हैं और उन्हें साफ करते हैं। इसके अलावा, इस दिन शमी के पेड़ की भी पूजा की जाती है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष में छिपाए थे।
रावण दहन
शाम के समय रावण दहन किया जाता है, जो अहंकार और बुराई के अंत का प्रतीक है। इस दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म की हमेशा जीत होती है, चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो। दशहरा 2025 की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
















