जशपुर : छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में पुलिस ने गांजा तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। मामला कोतवाली थाना जशपुर क्षेत्र के विवेकानंद कॉलोनी का है, जहां किराये के एक मकान में भारी मात्रा में गांजा डंप कर रखा गया था। पुलिस को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर छापेमारी की गई, जिसमें मौके से 24 किलो गांजा बरामद किया गया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो युवकों—सुनील भगत और रवि विश्वकर्मा—को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपी किराये के मकान में गांजा छिपाकर तस्करी की तैयारी कर रहे थे।
प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। इसके बाद जब सुनील भगत से कड़ाई से पूछताछ की गई तो उसने बड़ा खुलासा किया। पूछताछ में सामने आया कि इस अवैध कारोबार में पुलिस विभाग के दो आरक्षक भी शामिल हैं। आरोपी सुनील भगत ने बताया कि तपकरा थाने में पदस्थ आरक्षक धीरेन्द्र मधुकर और अमित त्रिपाठी उनकी मदद करते थे और गांजा तस्करी में सहयोग करते थे। यह जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल जांच शुरू कराई।
जांच के बाद दोनों आरक्षकों की संलिप्तता पाए जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ 20बी एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत अपराध दर्ज किया है। जब्त किए गए गांजा की अनुमानित कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। गौरतलब है कि पुलिस इससे पहले सुनील भगत और रवि विश्वकर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। बाद में सामने आए तथ्यों के आधार पर दोनों आरक्षकों को भी हिरासत में लेकर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
इस मामले ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि जिन पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, उन्हीं पर अवैध तस्करी में शामिल होने का आरोप लगा है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।





















