Korba

CG : DY CM के प्रभार जिले में करप्शन का पोल खोलने पर मिली बर्खास्तगी की सजा, जवान के आत्महत्या की कोशिश के बाद सिस्टम पर उठने लगे सवाल

कोरबा : छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के बाद सार्वजनिक मंचों से जीरों टाॅलरेंस का लगातार दावा किया जाता है। लेकिन इन दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। जीं हां ताजा मामला डिप्टी सीएम अरूण साव के प्रभार जिला कोरबा की है, जहां अफसर के सामने सिस्टम में व्याप्त करप्शन की सच्चाई बताने पर होमगार्ड के एक जवान को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। जांच के नाम पर अधिकारियों की मानसिक प्रताड़ना से परेशान बर्खास्त जवान की खुदकुशी के प्रयास की घटना और तीन पन्नों के सुसाइड नोट ने एक बार फिर सूबे की सरकारी सिस्टम और बेलगाम अफसरशाही पर सवाल खड़े कर दिये है।

वहीं इस घटना के बाद एक बार फिर होमगार्ड के जवान पीड़ित साथी को न्याय दिलाने और जवाबदार अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को लेकर हड़ताल पर बैठ गये है। गौरतलब है कि कोरबा जिले में पिछले डेढ़ महीने से भी अधिक वक्त से नगर सेना के जवान और जिला सेनानी अनुज एक्का के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। होमगार्ड की महिला जवानों ने जिला सेनानी पर पूर्व में ही गंभीर आरोप लगाते हुए महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ का गंभीर आरोप लगाया था। वहीं पुरूष जवानों ने छोटी-छोटी बातों पर सजा के साथ ही सीट रोल खराब करने की धमकी दिये जाने का आरोप लगाया था।

होमगार्ड जवानों के कामबंद हड़ताल के बाद संभागीय सेनानी बिलासपुर नरसिंग नेताम को मामले की जांच के लिए भेजा गया था। 4 जनवरी 2025 को सम्मलेन कैम्प आयोजित कर जवानों से संभागीय सेनानी ने जवानों की समस्या जानने का प्रयास किया गया था। इस सम्मेलन में होमगार्ड जवान संतोष पटेल ने सार्वजनिक रूप से नगर सेना में चल रहे करप्शन के गंभीर आरोप लगाये थे। उसने आरोप लगाया था कि हर 3 साल में होने वाले नामांकन को जिला सेनानी द्वारा रोक दिया जाता है। और उन्हे संभागीय सेनानी कार्यालय से पैसे देकर नामांकन किया जाता है। जवान ने दावा किया था कि उसका भी नाकांकन को रोका गया था,

तब उसने अपने पुस्तैनी खेत बेचकर 50 हजार रूपये संभागीय सेनानी कार्यालय में देकर नामांकन का कार्य पूरा कराया था। होमगार्ड संतोष पटेल के इस खुलासे के बाद मौके पर मौजूद संभागीय सेनानी के साथ ही जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के अफसर भी सख्ते में आ गये थे। आरोप है कि संतोष पटेल के इस बयान के बाद संभागीय सेनानी नरसिंग नेताम ने उसे बिलासपुर बुलाकर जमकर फटकार लगाने के साथ ही बर्खास्त करने की धमकी दी थी।

करप्शन के खिलाफ कार्रवाई की जगह होमगार्ड को किया बर्खास्त

इस पूरे घटनाक्रम में होमगार्ड संतोष पटेल के इस बयान पर जवाबदार अधिकारियों ने समय रहते सिस्टम में व्याप्त करप्शन के खिलाफ तो कोई कार्रवाई नही की गयी। उल्टे विभाग में व्याप्त करप्शन की सच्चाई सामने लाने वाले होमगार्ड संतोष पटेल को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। विभाग के तानाशाही आदेश से आहत बर्खास्त जवान ने 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के दिन कलेक्टर कार्यालय में जाकर जहर का सेवन कर आत्महत्या की कोशिश की।

घटना की जानकारी मिलते ही उसे आनन फानन में मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। समय पर उपचार होने से बर्खास्त जवान की जान तो बचा ली गयी, लेकिन जवान के जेब से मिले 3 पन्नों के सुसाइड नोट ने सिस्टम की कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये कि आखिर सवाल उठाने वाले जवानों को किस आधार पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया ? क्या जीरों टाॅलरेंस सिर्फ राजनेताओं के बयान और भाषणों तक ही सीमित है ? या फिर अफसरशाही के आतंक से किसी जवान की मौत के बाद सरकारी सिस्टम की नींद खुलेगी ?

अधिकारियों के खिलाफ FIR के लिए हड़ताल पर बैठे जवान

होमगार्ड से बर्खास्त जवान संतोष पटेल की खुदकुशी के प्रयास के बाद एक बार फिर नगर सेना के जवान हाथों पर तख्ती लिये हड़ताल पर बैठ गये है। नगर सेना के जवान और जिला सेनानी के बीच आत्मसम्मान को लेकर चल रही ये लड़ाई उस कोरबा जिले में जारी है, जहां से खुद सरकार के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन आते है और सरकार के डिप्टी सीएम अरूण साव इस जिले के प्रभारी मंत्री है। बावजूद इसके पिछले डेढ़ महीने से होमगार्ड की महिला जवान जिला सेनानी की तानाशाही और महिलाओं के अपमान को खून के घूंट पीकर बर्दाश्त कर रही है,

जबकि अफसरशाही से प्रताड़ित जवान जहर सेवन कर आत्महत्या की कोशिश कर रहे है। बाजवूद इसके कानून व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाले इन होमगार्ड जवानों की तकलीफ जानने का किसी भी जवाबदार जनप्रतिनिधि और मंत्री ने प्रयास नही किया। ऐसे में एक बार फिर इन जवानों ने अपने साथी को न्याय दिलाने और दोषी अधिकारियों पर अपराध दर्ज करने की मांग को लेकर हड़ताल पर बैठ गये है। अब ये देखने वाली बात होगी कि समय रहते सरकार इस मामले का संज्ञान में लेती है या फिर किसी जवान की मौत के बाद सरकारी सिस्टम हरकत में आयेगी, ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।

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