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CG Breaking : धान खरीदी संकट,1800 कर्मचारियों ने दिया सामूहिक इस्तीफा: धरना स्थल पर बघेल का सरकार पर हमला, बोले – यह पूरा खेल ….

दुर्ग : छत्तीसगढ़ में धान खरीदी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही संकट गहरा गया है। सहकारी समितियों के हजारों कर्मचारी, जिनमें प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर और दैनिक वेतनभोगी शामिल हैं, 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस बीच, दुर्ग संभाग के 1800 कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया है।

यह आंदोलन आज 14वें दिन भी जारी रहा, जिससे प्रदेशभर में धान खरीदी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। समितियों में टोकन जारी होना बंद हो गया है, और किसान अपनी धान बेचने के लिए सोसायटियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इस हड़ताल में प्रदेश के सात जिलों से लगभग ढाई हजार कर्मचारी प्रतिदिन दुर्ग के मानस भवन के पास धरना स्थल पर एकत्रित हो रहे हैं।

इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल धरना स्थल पर पहुंचे। उनके साथ डोंडी-लोहारा विधायक अनिला भेड़िया, बालोद विधायक संगीता सिन्हा, गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद और भिलाई की पूर्व महापौर नीता लोधी भी मौजूद थीं।

सरकार पर “तुगलकी फरमान” लागू करने का आरोप

धरना स्थल पर मीडिया से बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू हो चुकी है, लेकिन कोई भी किसान अपनी धान नहीं बेच पा रहा है, क्योंकि टोकन जारी नहीं हो रहे हैं। बघेल ने आरोप लगाया कि “तुगलकी फरमान” के कारण कर्मचारी काम करने में असमर्थ हैं और सरकार का गलत रवैया पूरी व्यवस्था को बाधित कर रहा है।

बघेल ने आगे कहा कि सरकार की सख्ती और नए आदेशों के कारण समिति प्रबंधक, सहायक प्रबंधक, लेखापाल, कंप्यूटर ऑपरेटर और चपरासी सहित सभी वर्ग के कर्मचारी परेशान हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार चाहे तो “एक झटके में” इस समस्या का समाधान कर सकती है।

बघेल का आरोप- एग्रो स्टेट पोर्टल से डेढ़ लाख किसान बाहर

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “एग्रो स्टेट पोर्टल की वजह से डेढ़ लाख किसानों के नाम काट दिए गए हैं। लाखों हेक्टेयर जमीन सोसायटियों में दर्ज नहीं हो पाई है। आदिवासी क्षेत्रों में जिन किसानों को पट्टा मिला है, वे भी अपनी धान नहीं बेच पाएंगे।” बघेल ने इसे “धान अडानी से खरीदवाने की तैयारी का पूरा षड्यंत्र” बताया।उन्होंने कहा कि जैसे हिमाचल में सेब खरीद का पूरा नियंत्रण अदाणी को दिया गया। “वैसे ही आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में धान खरीदी अडानी करेगा।”

बघेल ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को जोड़ते हुए कहा- आजकल प्रधानमंत्री मोदी, विष्णु देव साय की बहुत तारीफ कर रहे हैं। क्योंकि यह सब उनकी इच्छा पर हो रहा है। पहले खदानें–प्लांट अडानी को दिए, अब धान खरीदी भी उसी तरफ ले जाई जा रही है।”उन्होंने चेतावनी दी कि यह केवल सहकारी समितियों का संघर्ष नहीं है- “यह किसानों, राइस मिलरों और पूरे छत्तीसगढ़ की लड़ाई है।”

एस्मा–एफआईआर पर बोले बघेल- “कर्मचारी डरने वाले नहीं, मैं भी नहीं डरा”

सरकार द्वारा आंदोलनकारी कर्मचारियों पर एस्मा और एफआईआर लगाए जाने पर बघेल बोले-” यह सरकार विरोध करने वालों पर FIR ही करती है। कर्मचारी डरने वाले नहीं हैं। जिस तरह मेरे खिलाफ कार्रवाई हुई, वैसे ही अब इन पर हो रही है-पर हम छत्तीसगढ़िया हैं, लड़ना नहीं छोड़ेंगे।”

“कुछ दिन बाद आप सहकारिता के कर्मचारी नहीं, अडानी के कहलाएंगे”

बघेल ने कर्मचारियों को चेताया- आज आप सहकारिता विभाग के कर्मचारी हैं, कल अडानी के कर्मचारी कहलाएंगे। इसलिए यह लड़ाई जरूरी है।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी इस मामले को विधानसभा के एक दिन के विशेष सत्र में जोरदार तरीके से उठाएगी।

छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ की घोषणा: 1800 कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा

धरना स्थल पर महासंघ के कोषाध्यक्ष जागेश्वर साहू ने बताया- लगातार 14 दिनों से आंदोलन जारी है। सरकार कार्रवाई कर रही है, बर्खास्तगी की बातें हो रही हैं। इसी के विरोध में दुर्ग संभाग के 1800 कर्मचारी आज सामूहिक इस्तीफा संभाग आयुक्त को सौंप रहे हैं। दुर्ग संभाग में लगभग 1500 नियमित और 300 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हैं।

चार सूत्री प्रमुख मांगें

महासंघ इन चार प्रमुख मांगों पर अडिग है-

1. मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रत्येक समिति को 3–3 लाख रुपये प्रबंधकीय अनुदान।

2. उपार्जन कार्य में सुखत धान का 2023–24, 2024–25 और आगे का स्पष्ट प्रावधान।

3. 2018 के सेवा नियम में संशोधन और बैंक भर्ती में समिति कर्मचारियों को प्राथमिकता।

4. कंप्यूटर ऑपरेटरों को 6 माह नहीं, धान नीति के अनुसार 12 माह का वेतन और नियमितीकरण।

साहू ने कहा- “हम भी किसान के बेटे हैं, धान खरीदी करना चाहते हैं, लेकिन मांगें पूरी हुए बिना काम शुरू नहीं करेंगे। जरूरत हुई तो जेल भरो आंदोलन भी करेंगे।

विष्णु देव का पहले समर्थन का पत्र, अब वही मांगें आंदोलन में

कर्मचारियों ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री बनने से पहले विष्णु देव साय ने इसी आंदोलन का समर्थन किया था और तत्कालीन CM भूपेश बघेल को पत्र भेजा था। अब मांगें वही हैं, लेकिन कर्मचारियों को आंदोलन और FIR का सामना करना पड़ रहा है।

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