रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने आम जनता से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण सरकारी योजना को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा संचालित ‘मंत्री परिषद् सदस्य स्वेच्छानुदान नियम, 2019′ के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता और अनुदान के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। सरकार द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, अब इस योजना का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड का होना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस डिजिटल प्रमाणीकरण से कागजी कार्रवाई कम होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और सीधे तौर पर आम आदमी को बिना किसी रुकावट के त्वरित लाभ मिल सकेगा।R
किन-किन कामों के लिए मिलती है सरकारी सहायता?
राज्य सरकार की इस कल्याणकारी योजना के तहत समाज के जरूरतमंद, गरीब और होनहार लोगों को सीधे आर्थिक मदद दी जाती है। इस योजना का खर्च राज्य की समेकित निधि के विवेकाधीन अनुदान मद से वहन किया जाता है। इसके तहत निम्नलिखित क्षेत्रों में अनुदान दिया जाता है:
- इलाज के लिए मदद: गंभीर बीमारियों के चिकित्सा उपचार हेतु अनुदान।
- शिक्षा और खेल: गरीब बच्चों के शिक्षण और खेल, कला, विज्ञान, ईमानदारी व बहादुरी के लिए पुरस्कार।
- गरीब और दिव्यांग: निर्धन या दिव्यांग व्यक्तियों की सहायता और स्वरोजगार हेतु अनुदान।
- बेटियों की शादी: निर्धन परिवारों की कन्या विवाह हेतु आर्थिक सहायता।
- अनाथ बच्चों की मदद: अनाथों को अनुदान (नाबालिग होने पर उनके पालक के नाम पर)।
अगर आधार कार्ड नहीं है, तो क्या बंद हो जाएगा पैसा?
आम जनता को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि आपके पास फिलहाल आधार नंबर नहीं है, तो भी आपका लाभ तुरंत बंद नहीं किया जाएगा। इसके लिए एक्सेप्शन हैंडलिंग मैकेनिज्म यानी अपवाद प्रबंधन तंत्र लागू रहेगा।
महत्वपूर्ण नियम: जब तक आपको नया आधार नंबर अलॉट नहीं हो जाता, तब तक आप आधार केंद्र की नामांकन पर्ची के साथ कुछ अन्य वैकल्पिक दस्तावेज दिखाकर भी अपनी सहायता राशि प्राप्त कर सकते हैं।
18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए जरूरी दस्तावेज
यदि लाभार्थी 18 वर्ष से कम उम्र का बालक या बालिका है और उसके पास आधार नहीं है, तो माता-पिता या विधिक संरक्षक की सहमति से आधार नामांकन कराना होगा। तब तक पहचान के लिए निम्नलिखित दस्तावेज मान्य होंगे:
- आधार नामांकन केंद्र की एक्नॉलेजमेंट स्लिप।
- जन्म प्रमाण पत्र या भारतीय पासपोर्ट।
- मान्यता प्राप्त स्कूल बोर्ड द्वारा जारी 10वीं या 12वीं की अंकसूची।
- माता-पिता के साथ रिश्ता साबित करने के लिए राशन कार्ड या राजपत्रित अधिकारी द्वारा जारी जाति/निवास प्रमाण पत्र।
18 वर्ष से अधिक आयु के वयस्कों के लिए नियम
18 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों के पास आधार न होने की स्थिति में नामांकन पर्ची (EID) के साथ ये दस्तावेज उपयोग किए जा सकते हैं:
- भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी मतदाता फोटो पहचान पत्र।
- राज्य सरकार द्वारा जारी वैध राशन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस।
- तहसीलदार या कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी जाति या मूल निवास प्रमाण पत्र।
- केंद्र/राज्य सरकार या सार्वजनिक उपक्रम द्वारा जारी मेडिकल या सेवा पहचान पत्र।
- विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र।
बायोमेट्रिक फेल होने पर भी मिलेगा लाभ: जानिए सरकार का ‘बैकअप प्लान‘
कई बार बुजुर्गों या मेहनत-मजदूरी करने वाले भाई-बहनों के हाथों की रेखाएं घिस जाने के कारण अंगूठे का निशान मैच नहीं करता है। इसके समाधान के लिए सरकार ने विशेष तकनीकी व्यवस्था की है:
- OTP का विकल्प: फिंगरप्रिंट या आइरिस (आंखों का स्कैन) काम न करने पर मोबाइल पर वन-टाइम पिन (OTP) भेजा जाएगा।
- ऑफलाइन वेरिफिकेशन: यदि ऑनलाइन प्रमाणीकरण पूरी तरह फेल हो जाता है, तो आधार कार्ड पर छपे सिक्योर क्यूआर कोड को mAadhaar ऐप या स्कैनर से स्कैन करके ऑफलाइन सत्यापन किया जाएगा।
- बाल संरक्षण: किसी भी बच्चे को आधार प्रमाणीकरण न होने की स्थिति में योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री को मिलेगी नियमों में शिथिलता देने की विशेष शक्ति
इस पूरी अधिसूचना में आम आदमी के हित को सर्वोपरि रखा गया है। राजपत्र में प्रकाशित इस आदेश के अनुसार, यदि कोई बहुत ही असाधारण या आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होती है, तो मुख्यमंत्री को इन नियमों में शिथिलता प्रदान करते हुए विवेकाधीन अनुदान स्वीकृत करने का विशेष अधिकार होगा। इसके तहत किसी भी वास्तविक हकदार नागरिक को सहायता से वंचित नहीं होने दिया जाएगा।























