भुवनेश्वर : ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस-वोटिंग के मामले में कांग्रेस ने अपने तीन विधायक सोफिया फिरदौस, रमेश जेना और दसरथी गोमांगो को पार्टी से निलंबित कर दिया है। पार्टी ने यह कार्रवाई “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के चलते की है।
बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे पहुंचे राज्यसभा
दरअसल, ओडिशा विधानसभा में कांग्रेस के 14 विधायक हैं और पार्टी ने चौथी राज्यसभा सीट के लिए बीजेडी उम्मीदवार दत्तेश्वर होता को समर्थन दिया था। लेकिन बीजेडी और कांग्रेस के कुछ विधायकों की क्रॉस-वोटिंग के कारण बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे ने यह सीट जीत ली। इस क्रॉस-वोटिंग के चलते विपक्ष को नुकसान हुआ। राज्यसभा चुनाव में बीजेपी को दो सीटें मिलीं, जबकि एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के खाते में गई। बीजेडी को भी एक सीट मिली।
ततकाल प्रभाव से विधायक निलंबित
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया चेयरमैन अरबिंद दास ने बताया कि इन तीनों विधायकों ने पार्टी के निर्देश के खिलाफ जाकर बीजेपी समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया, जिसके कारण उन्हें तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इस चुनाव में बीजेपी के मनमोहन सामल और सुजीत कुमार, बीजेडी के संत्रुप्त मिश्रा और निर्दलीय दिलीप रे राज्यसभा के लिए चुने गए हैं।
ओडिशा के विकास के लिए पूरी मेहनत का वादा
जीत के बाद दिलीप रे पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचे और भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि उन्हें बीजेपी, बीजेडी और कांग्रेस के नेताओं का समर्थन मिला, जिसके लिए वे सभी का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि वे ओडिशा के विकास के लिए पूरी मेहनत करेंगे। वहीं, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सभी विजयी उम्मीदवारों को बधाई दी और कहा कि यह “समृद्ध ओडिशा” के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास” के विजन का भी जिक्र किया। उधर, बिहार में भी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस और आरजेडी विधायकों के मतदान से दूर रहने का फायदा एनडीए को मिला। एनडीए ने बिहार की सभी पांच सीटें जीत लीं। देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हुए थे। इनमें से 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके थे, जबकि बाकी 11 सीटों पर मतदान कराया गया।






















