रायपुर : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले स्थित उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यहां के घने जंगलों में लगाए गए ट्रैप कैमरे में एक टाइगर की तस्वीर कैद हुई है, जिसके बाद वन विभाग की टीम सतर्क हो गई है। बाघ की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद आसपास के गांवों में ग्रामीणों को मुनादी के जरिए सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। दरअसल उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व का जंगल जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों का निवास है।
रिजर्व के जंगलों में लगाए गए ट्रैप कैमरों में अक्सर तेंदुआ, भालू, हिरण, उदबिलाव सहित कई दुर्लभ वन्यजीवों की तस्वीरें कैद होती रहती हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए भी अनुकूल माना जाता है, जिसके कारण यहां कई दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी भी समय-समय पर दर्ज की जाती रही है। लेकिन इस बार सामने आई तस्वीर ने वन विभाग को विशेष रूप से सतर्क कर दिया है। जानकारी के अनुसार 5 मार्च 2026 को जंगल में लगाए गए ट्रैप कैमरे में एक टाइगर की तस्वीर कैद हुई है। तस्वीर सामने आने के बाद वन विभाग की टीम टाइगर की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और उसके मूवमेंट को ट्रैक करने का प्रयास किया जा रहा है।
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि टाइगर की मौजूदगी जंगल के पारिस्थितिक संतुलन के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया जाए। इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी कर लोगों को जंगल की ओर अकेले न जाने और सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। गौरतलब है कि इससे पहले भी उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघ की मौजूदगी दर्ज की जा चुकी है। करीब दस महीने पहले अप्रैल 2025 में भी यहां के जंगलों में एक बाघ की तस्वीर ट्रैप कैमरे में कैद हुई थी।
उस समय बाघ अपने शिकार को खाते हुए दिखाई दिया था। हालांकि बाद में वह बाघ इस क्षेत्र से निकलकर बार नवापारा की दिशा में चला गया था। वन विभाग के अनुसार उस दौरान जंगल में बाघ के पगमार्क भी मिले थे, जिससे उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। इस बार फिर टाइगर के दिखाई देने से यह संभावना जताई जा रही है कि आसपास के जंगलों से बाघ यहां आ सकता है। इस पूरे मामले में उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने बताया कि रिजर्व के जंगलों में लगाए गए ट्रैप कैमरे में टाइगर की तस्वीर कैद हुई है।
वन विभाग की टीम लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही है और इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को भी मुनादी के माध्यम से सतर्क किया जा रहा है ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले अप्रैल 2025 में भी यहां बाघ की तस्वीर सामने आई थी, जो बाद में बार नवापारा की दिशा में निकल गया था। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस बार दिखाई दिया टाइगर कहां से आया है, लेकिन वन विभाग को आशंका है कि यह बाघ महाराष्ट्र के जंगलों से यहां पहुंचा हो सकता है।






















