नई दिल्ली : राजधानी में राशन कार्ड बनवाने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। सरकार ने राशन कार्डधारियों की वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करने के बाद करीब 8.27 लाख नए राशन कार्ड लाभार्थियों की वैकेंसी बनाने की घोषणा की है। अधिकारियों के मुताबिक, लंबे वेरिफिकेशन के बाद लाखों नाम लाभार्थियों की सूची से हटाए गए हैं, लेकिन अभी भी प्रक्रिया जारी है और जल्द ही नए कार्ड बनाने का काम शुरू होगा।
वेरिफिकेशन प्रक्रिया
बीजेपी के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने अपने गठन के बाद राशन कार्ड लाभार्थियों की वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू की थी। इस प्रक्रिया के दौरान कुल 8.27 लाख लोगों को राशन कार्ड के लिए फिट नहीं पाया गया।
इनमें से:
- 6.46 लाख लोग जिनकी आय ठीक-ठाक थी, लेकिन फिर भी मुफ्त राशन ले रहे थे।
- 95 हजार लोग एक साल से राशन लेने नहीं आए।
- 23 हजार से अधिक डुप्लिकेट राशन कार्ड पाए गए।
- 6185 लोगों की मृत्यु हो चुकी थी, फिर भी उनके परिवार वाले राशन का लाभ ले रहे थे।
- 56,372 लोगों ने खुद ही अपने नाम काटने का आवेदन किया।
अधिकारियों ने क्या बताया ?
अधिकारियों का कहना है कि इन नामों को हटाने के बाद सरकार अब लंबित आवेदनों के निपटारे और नए कार्ड वितरण की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। वर्तमान में दिल्ली में 11.65 लाख से अधिक लोग फूड सिक्योरिटी के हकदार हैं।
सरकार ने नियमों में बदलाव किया
सरकार ने नियमों में बदलाव किया है। अब राशन कार्ड आवेदनों को सीधे विभाग नहीं, बल्कि जिला स्तर पर बनी कमिटी तय करेगी। इस कमिटी की अध्यक्षता डीएम या एडीएम करेंगे, साथ में दो स्थानीय विधायक भी सदस्य होंगे। इसके अलावा, राशन कार्ड वितरण के लिए जिलेवार कोटा तय होगा। यह कोटा उस जिले की आबादी के हिसाब से निर्धारित किया जाएगा। नए नियम इस साल होने वाली जनगणना के बाद लागू होंगे।
कितने लाभार्थियों के नाम कटे
- दिल्ली में अभी भी 11,65,965 लोगों को फूड सिक्योरिटी की जरूरत
- दिल्ली का कुल कोटा 72.77 लाख लाभार्थी
- वेरिफिकेशन में 6,46,123 नाम हटाए गए (इनकम टैक्स मिसमैच)
- 56,372 लोगों ने खुद नाम कटवाने का आवेदन किया
- 95,682 कार्ड धारक एक साल से राशन लेने नहीं आए
- 23,394 डुप्लीकेट लाभार्थी मिले
- 6185 लाभार्थियों की मौत हो चुकी है
किन्हें नहीं मिलेगा राशन कार्ड का फायदा
- ए से ई श्रेणी में किसी भी प्रकार की बिल्डिंग या जमीन हो।
- आयकर दाता हों।
- निजी चार-पहिया वाहन या कमर्शियल वाहन के मालिक हों।
- 2 किलोवॉट से अधिक बिजली लोड का कनेक्शन हो।
- सरकारी कर्मचारी हों।





















