भोपाल : अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में मंत्री-परिषद द्वारा दिल्ली स्थित उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत प्रदेश के अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए संचालित छात्रगृह योजना में संशोधन करते हुए प्रति विद्यार्थी प्रतिमाह 10 हजार रुपए की राशि प्रदान किए जाने की स्वीकृति दी गई है।
विद्यार्थियों के लिए प्रतिमाह 10 हजार रुपए
मंत्री चौहान ने कहा कि छात्रगृह योजना में प्रतिवर्ष 100 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा, जिसमें 50 स्नातक और 50 स्नातकोत्तर स्तर के नवीन विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। साथ ही पूर्व से अध्ययनरत विद्यार्थियों को भी योजना का लाभ मिलेगा। इस निर्णय से अनुसूचित जाति वर्ग के अधिक विद्यार्थियों को देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में अध्ययन का अवसर मिलेगा जिससे वे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे और अपने करियर को नई दिशा दे सकेंगे। मंत्री चौहान ने कहा कि ऐसी योजनाएं सामाजिक न्याय को मजबूत करने और जरूरतमंद विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।
क्या है छात्रगृह योजना?
मध्यप्रदेश सरकार की ‘छात्रगृह योजना’ (अब आवास भत्ता सहायता) मुख्य रूप से अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST) के उन मेधावी विद्यार्थियों के लिए है, जो उच्च शिक्षा के लिए अपने घर से दूर किराए पर रहते हैं। इस योजना के तहत, दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों में पढ़ने वाले छात्रों को प्रतिमाह ₹10,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
छात्रगृह योजना के मुख्य विवरण
- उद्देश्य: आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को आवास किराए के लिए सहायता देकर उच्च शिक्षा पूरी करने में मदद करना
- लक्ष्य समूह: अनुसूचित जाति (SC)/अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र
- वित्तीय सहायता: योजना में संशोधन के बाद प्रति छात्र प्रतिमाह ₹10,000 तक की सहायता स्वीकृत है
- लाभार्थी संख्या: प्रतिवर्ष लगभग 100 नए विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जाता है (50 स्नातक, 50 स्नातकोत्तर)
- योग्यता: छात्र उच्च शिक्षण संस्थान में नियमित रूप से अध्ययनरत होना चाहिए






















