दतिया : मध्यप्रदेश के दतिया जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने डॉक्टर और मरीज के भरोसे को कलंकित कर दिया है। जिला अस्पताल में इलाज के नाम पर एक नवजात शिशु के साथ जो बर्बरता की गई, उसने न केवल एक गरीब परिवार को जख्म दिए हैं,बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम रिनिया निवासी आनंद जाटव की पत्नी रश्मि ने अस्पताल में बच्चों को जन्म दिया था। सामान्य प्रसव के कुछ समय बाद अचानक नवजात की तबीयत बिगड़ने लगी। घबराए पिता ने जब ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और महिला डॉक्टर से बच्चे को बचाने और सही उपचार देने की गुहार लगाई, तो मदद के बजाय उन्हें हैवानियत का सामना करना पड़ा।
पीड़ित पिता का आरोप है कि गिड़गिड़ाने पर डॉक्टर आगबबूला हो गए। संवेदनशीलता दिखाने के बजाय, डॉक्टर ने नवजात शिशु को पिता के हाथ से छीना और बेरहमी से जमीन पर फेंक दिया। इस अमानवीय कृत्य के कारण मासूम बच्चे का हाथ टूट गया है। यह घटना न केवल चिकित्सा जगत के लिए कलंक है, बल्कि सीधे तौर पर एक मासूम की जान से खिलवाड़ और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। पीड़ित परिवार और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं और दोषियों की पहचान की जाए।
इस जघन्य अपराध के लिए जिम्मेदार डॉक्टरों पर तत्काल FIR दर्ज कर उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए। अगर सरकारी अस्पतालों में गरीब और असहाय परिवार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता न्याय के लिए कहां जाएगी? गरीब की लाचारी का फायदा उठाकर उन्हें धमकाना और नवजात के साथ हिंसा करना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। दतिया प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इस मामले में जीरो टॉलरेंस अपनाते हुए मिसाल कायम करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी डॉक्टर अपने पद का दुरुपयोग न कर सके।





















