सीहोरः मध्य प्रदेश के सीहोर में नर्मदा नदी में दूध बहाने की खबर ने आज पूरे देश को दो धड़ों में बांट दिया है, जहां एक तरफ आस्था का तर्क है कि ‘नर्मदा मैया’ को 11 हजार लीटर दूध अर्पित करना अटूट श्रद्धा का हिस्सा है, वहीं दूसरी तरफ वो आंकड़े हैं जो रूह कंपा देते हैं। सवाल उठ रहे हैं उस प्रदेश में, जहां 10 लाख बच्चे आज भी कुपोषण की जंग लड़ रहे हैं, वहां क्या दूध की एक-एक बूंद किसी मासूम का गला तर नहीं कर सकती थी? क्या आस्था के नाम पर हजारों लीटर संसाधनों को बहा देना जायज है? आस्था और सामाजिक सरोकार के बीच छिड़ी इस बहस ने प्रशासन से लेकर आम जनता तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
बाबा शिवानंद महराज ने क्या कहा?
बाबा शिवानंद महराज से नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध बहाने को लेकर सवाल किए। इस सवाल का जवाब देते हुए बाबा शिवानंद ने कहा कि, हम अलग-अलग जगहों पर हवन करते हैं और नर्मदा के किनारे भी हम पीछले 21 दिनों से हवं कर रहे थे। हर रोज 151 लीटर दूध से नर्मदा नदी में अभिषेक किया जा रहा था। उन्होंने आगे कहा कि, आज से 10-15 साल पहले जब हम परिक्रमा करने आते थे तो नर्मदा जी में दूध की धारा चलती हुई नजर आती थी, जो की अब नहीं नजर आती। बाबा शिवानंद महराज ने आगे बताया कि, माता नर्मदा ने उनके सपने में आकर उन्हें दूध चढाने के लिए कहा इसी वजह से उन्होंने 11 हजार लीटर दूध से दुग्धाभिषेक करवाया।
जवाब सुनते ही चर्चा छोड़कर निकले बाबा
वहीं दूसरी तरफ शिक्षा विध अवि शुक्ला से जब दुग्धाभिषेक को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने बताया कि, दूध में बहुत सारे अलग-अलग प्रकार के प्रोटीन होते हैं और इतनी बड़ी मात्रा में नदी में दूध बहाने से नदी के ऊपर एक लेयर बन जाती है। इस लेयर के चलते पानी में रहने वाले जीवों को ऑक्सीजन मिलने में परेशानी होती है। शिक्षा विध की इस बात को सुनते ही बबब शिवानंद महराज नाराज हो गए और चर्चा को बीच में छोड़कर ही चले गए।






















