Raipur

CG Breaking : चैतन्य बघेल के विरुद्ध आठवां अभियोग पत्र पेश, जांच में बड़े खुलासे

रायपुर : छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने जांच को और तेज करते हुए बड़ा कदम उठाया है। विवेचनाधीन आबकारी घोटाला प्रकरण में आज विशेष न्यायालय रायपुर में चैतन्य बघेल के खिलाफ अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। यह इस मामले में अब तक दाखिल किया गया आठवां अभियोग पत्र है। इससे पहले मूल अभियोग पत्र सहित कुल सात अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किए जा चुके थे। प्रस्तुत चालान में अब तक गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों के संबंध में जांच की वर्तमान स्थिति को विस्तार से रखा गया है।

इसके साथ ही, डिजिटल एविडेंस से जुड़ी रिपोर्ट भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई है, जिसमें वित्तीय लेन-देन, बैंकिंग रिकॉर्ड, फर्मों के दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शामिल हैं। जिन आरोपियों के खिलाफ जांच अभी जारी है, उनके मामलों की अद्यतन स्थिति का भी अभियोग पत्र में उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकरण की विवेचना निरंतर जारी है और आने वाले समय में और खुलासे संभव हैं। ईओडब्ल्यू/एसीबी की जांच में चैतन्य बघेल की भूमिका बेहद अहम और प्रभावशाली पाई गई है।

जांच के अनुसार, चैतन्य बघेल पर आरोप है कि उन्होंने तत्कालीन आबकारी विभाग में एक संगठित वसूली तंत्र (सिंडिकेट) को खड़ा करने, उसके संचालन, समन्वय और संरक्षण में केंद्रीय भूमिका निभाई। आरोप है कि वे प्रशासनिक स्तर पर सिंडिकेट के हितों के अनुसार काम करने वाले अधिकारियों—जिनमें अनिल टुटेजा, सौम्या चैरसिया, अरुणपति त्रिपाठी और निरंजन दास जैसे नाम शामिल हैं—और सिंडिकेट के जमीनी स्तर के मुखियाओं अनवर ढेबर, अरविंद सिंह और विकास अग्रवाल के बीच तालमेल बैठाने और उन्हें निर्देशित करने का कार्य करते थे।

जांच में यह भी सामने आया है कि चैतन्य बघेल, अनवर ढेबर की टीम द्वारा एकत्र की गई घोटाले की रकम को अपने भरोसेमंद लोगों के माध्यम से उच्च स्तर तक पहुंचाने और उसका प्रबंधन करने में सक्रिय थे। अभियोजन के अनुसार, उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लन की विभिन्न फर्मों के जरिए अपने हिस्से की रकम प्राप्त की और बैंकिंग चैनल के माध्यम से उसे अपनी पारिवारिक फर्मों में ट्रांसफर कराया। इस धन का उपयोग निर्माणाधीन रियल एस्टेट परियोजनाओं सहित अन्य निवेशों में किया गया। इसके अलावा, पारिवारिक मित्रों और सहयोगियों के माध्यम से भी बड़ी मात्रा में अवैध धन को बैंकिंग चैनलों से प्राप्त कर निवेश करने के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।

ईओडब्ल्यू/एसीबी के अनुसार, अब तक की जांच में यह संकेत मिले हैं कि चैतन्य बघेल को लगभग 200 से 250 करोड़ रुपये अपने हिस्से में प्राप्त हुए। साथ ही, उनके द्वारा सिंडिकेट को उपलब्ध कराए गए उच्चस्तरीय संरक्षण, नीतिगत और प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण यह अवैध गतिविधि लंबे समय तक चलती रही। वर्तमान में गणना के आधार पर आबकारी घोटाले की कुल राशि करीब 3074 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि आगे की जांच में यह आंकड़ा 3500 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

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